भारतीय रेलवे की बड़ी पहल! देश को मिली पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत रूट पर होगा संचालन

भारतीय रेलवे की बड़ी पहल! देश को मिली पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत रूट पर होगा संचालन

भारतीय रेलवे की बड़ी पहल! देश को मिली पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद-सोनीपत रूट पर होगा संचालन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
: May 27, 2026, 3:35:00 PM

भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित DEMU ट्रेन को मंजूरी दे दी है। 10 कोच वाली यह आधुनिक ट्रेन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलाई जाएगी। इस परियोजना को भारतीय रेल के हरित और तकनीक आधारित भविष्य की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से इसे आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे लगातार नई तकनीकों को अपनाकर देश की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बना रही है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, यह ट्रेन पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी। इसमें दो पावर कार लगाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1200 किलोवाट है। इन्हीं फ्यूल सेल के जरिए उत्पन्न बिजली से ट्रेन का संचालन किया जाएगा। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण के अनुकूल होना है। पारंपरिक डीजल इंजनों के विपरीत यह ट्रेन धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं करेगी। इसके संचालन के दौरान केवल जलवाष्प उत्सर्जित होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी। साथ ही इसकी आवाज भी सामान्य ट्रेनों की तुलना में काफी कम होगी, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है।

रेलवे ने सुरक्षा और तकनीकी निगरानी के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। शुरुआती चरण में इस ट्रेन का रखरखाव दिल्ली स्थित शकूरबस्ती डिपो में किया जाएगा। पहले तीन महीनों तक विशेषज्ञ तकनीकी टीम ट्रेन के साथ तैनात रहेगी ताकि किसी भी तकनीकी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके।

इसके अलावा हाइड्रोजन प्लांट और ट्रेन में लगे सेंसरों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में हाइड्रोजन आधारित तकनीक देश में स्वच्छ, सुरक्षित और किफायती रेल सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के ऊर्जा संक्रमण और टिकाऊ विकास के बड़े लक्ष्य से भी जुड़ी हुई है। रेलवे की यह पहल आने वाले वर्षों में देश की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकती है।