2007 के डबल म*र्डर से एनका*उंटर तक... ऐसी रही गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की क्राइम कुंडली

झारखंड पुलिस ने राज्य के चर्चित गैंगस्टरों में शामिल सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जेल शिफ्टिंग के दौरान पुलिस और सुजीत सिन्हा के बीच हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। लंबे समय से संगठित अपराध, रंगदारी और कई संगीन मामलों में वांछित सुजीत सिन्हा का नाम झारखंड के अपराध जगत में बेहद चर्चित रहा है।
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड स्थित पथरा गांव का मूल निवासी सुजीत सिन्हा मेदिनीनगर के श्रीरामपथ इलाके में बड़ा हुआ था। उसके परिवार में बड़ा भाई, एक बहन और पत्नी रिया सिन्हा हैं। रिया सिन्हा भी आपराधिक मामलों में जेल में बंद है, जबकि उसकी मां बड़े बेटे के साथ दूसरे शहर में रहती हैं।
2007 के दोहरे हत्याकांड से मिली अपराध जगत में पहचान
सुजीत सिन्हा का नाम पहली बार वर्ष 2007 में उस समय सुर्खियों में आया, जब पलामू के टाउन थाना क्षेत्र में टेंडर विवाद को लेकर अनिल सिंह और भूषण सिंह नामक दो सगे भाइयों की हत्या कर दी गई थी। जांच में इस दोहरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड सुजीत सिन्हा को माना गया। इसी घटना के बाद उसने अपराध की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली।
इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2019 में पलामू की अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इससे पहले भी वह फायरिंग के एक मामले में जेल जा चुका था और रिहाई के बाद उसने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था। इसके बाद पलामू में रंगदारी और संगठित अपराध के कई मामलों में उसका नाम लगातार सामने आता रहा।
वर्ष 2024 में सुजीत सिन्हा को पलामू की विभिन्न अदालतों से 16 से अधिक मामलों में राहत मिली थी। उस समय उसके खिलाफ जिले में 45 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज बताए गए थे। बाद के वर्षों में कुछ मामलों के निष्पादन के बाद वर्ष 2026 तक उसके खिलाफ पलामू में करीब 20 मुकदमे लंबित रहे।
इसी दौरान पलामू पुलिस ने उसकी कथित सांठगांठ धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान से भी जोड़ी थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों के बीच आपराधिक नेटवर्क को लेकर संपर्क होने की बात सामने आई थी।
रंगदारी के हाई-प्रोफाइल मामलों में भी रहा नाम
सुजीत सिन्हा का नाम पलामू के एक पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष से रंगदारी मांगने के चर्चित मामले में भी सामने आया था। हालांकि, इस मुकदमे में उसे अदालत से बरी कर दिया गया था। इसके बावजूद उसके खिलाफ समय-समय पर नए आपराधिक मामले दर्ज होते रहे और वह राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जाता रहा।
पुलिस मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा की मौत के साथ झारखंड के संगठित अपराध जगत के एक चर्चित चेहरे का अंत हो गया। अब पुलिस इस पूरे घटनाक्रम और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क की आगे की जांच में जुटी है।













