14 साल बाद फिर खुलेगी पलामू की ग्रेफाइट माइंस! 4 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
14 साल बाद फिर खुलेगी पलामू की ग्रेफाइट माइंस! 4 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
झारखंड के पलामू जिले के विश्रामपुर क्षेत्र में लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी ग्रेफाइट खदानों को दोबारा संचालित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (JSMDC) और खान विभाग ने परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। यदि सभी आवश्यक मंजूरियां समय पर मिल जाती हैं, तो इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब चार हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध होने की संभावना है।
यह खनन पट्टा वर्ष 1976 में तत्कालीन बिहार स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BSMDC) को आवंटित किया गया था। वर्तमान लीज की अवधि वर्ष 2026 तक प्रभावी है। इसके आगे संचालन जारी रखने के लिए लीज विस्तार और नवीनीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है।
ग्रेफाइट खनन वर्ष 2012 के बाद से पूरी तरह ठप पड़ा है। इसकी प्रमुख वजह वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत आवश्यक वन स्वीकृतियां नहीं मिल पाना रही। अब संबंधित विभाग वन एवं पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि खदानों में फिर से व्यावसायिक खनन शुरू किया जा सके।
पूरे लीज क्षेत्र का रकबा 223.44 हेक्टेयर है, लेकिन शुरुआती चरण में केवल 25 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन प्रस्तावित है। पहले चरण में ब्लॉक-1 और ब्लॉक-3 को शामिल किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि सीमित क्षेत्र से शुरुआत करने से परियोजना को कम समय में धरातल पर उतारा जा सकेगा।
पूरे लीज क्षेत्र में ग्रेफाइट के पर्याप्त भंडार मौजूद हैं। हालांकि, इसमें लगभग 167 हेक्टेयर वन भूमि और करीब 30 हेक्टेयर रैयती भूमि शामिल होने के कारण व्यापक स्तर पर खनन फिलहाल संभव नहीं है। भूमि अधिग्रहण और वन विभाग से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने तक सीमित क्षेत्र में ही खनन कार्य संचालित करने की योजना बनाई गई है।
भू-वैज्ञानिक आकलन के अनुसार, प्रस्तावित 25 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 0.2731 मिलियन टन यानी करीब 2.73 लाख टन ग्रेफाइट का भंडार उपलब्ध है। माइनिंग प्लान के मुताबिक यहां हर वर्ष लगभग 30,484 टन ग्रेफाइट का उत्पादन किया जा सकता है, जिससे लगभग सात वर्षों तक नियमित खनन संभव होगा।
परियोजना के सीमित दायरे से शुरुआत करने का एक बड़ा फायदा लागत में कमी भी है। यदि पूरे 167.48 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लिए एक साथ मंजूरी ली जाती, तो वन स्वीकृति, एनपीवी, क्षतिपूरक वनीकरण, भूमि अधिग्रहण और अन्य औपचारिकताओं पर करीब 39.78 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं, शुरुआती 25 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए यह लागत घटकर लगभग 1.48 करोड़ रुपये रह जाएगी, जिससे परियोजना को तेजी से शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
खान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पलामू की इस महत्वपूर्ण खनन परियोजना को दोबारा शुरू करने की पहल खान निदेशक स्तर पर की जा रही है। आवश्यक अनुमतियां मिलने के बाद विश्रामपुर की बंद पड़ी ग्रेफाइट खदानें एक बार फिर उत्पादन शुरू कर सकती हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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