कोयला तस्करी की काली कमाई पर ED का वार, धनबाद में 31 ठिकानों पर छापेमारी

धनबाद में कथित अवैध कोयला खनन और तस्करी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने व्यापक कार्रवाई करते हुए दो दिनों के भीतर 31 अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। शुरुआती जांच में बड़ी मात्रा में नकदी, अचल संपत्तियों और विभिन्न निवेशों से जुड़े अहम दस्तावेज सामने आने की जानकारी मिली है। कार्रवाई के दौरान जिन लोगों के परिसरों की तलाशी ली गई, उनसे एजेंसी ने पंचनामा तैयार करवाया और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ भी की।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीम ने पूछताछ के दौरान अवैध रूप से निकाले गए कोयले के स्रोत, उसके परिवहन के तरीके और किन-किन ईंट भट्ठों या अन्य इकाइयों तक उसकी आपूर्ति की गई, इससे जुड़े सवालों पर विशेष जोर दिया। साथ ही यह भी जानने की कोशिश की गई कि पूरे नेटवर्क का संचालन किन लोगों के निर्देश पर होता था, आर्थिक लेन-देन की श्रृंखला क्या थी और अवैध कमाई आखिर किसके पास पहुंचती थी।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एजेंसी की नजर अब भगवती माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मिथिलेश सिंह उर्फ सोनू सिंह पर केंद्रित है। बताया जा रहा है कि वह सिंदरी स्थित मर्सलिंग यार्ड के संचालन से जुड़ा हुआ है। जांच में उस पर लगभग 50 से 60 हजार टन कोयले की कथित हेराफेरी के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि पश्चिम बंगाल के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कोयले को विभिन्न भट्ठों तक पहुंचाने की कथित व्यवस्था कैसे संचालित की जाती थी। इसके अलावा उन कंपनियों की पहचान करने की भी कोशिश की जा रही है, जो कागजों में पश्चिम बंगाल से माल उठाकर उसी राज्य में आपूर्ति दिखाती थीं, जबकि वास्तविक आपूर्ति और परिवहन के तरीके अलग होने की आशंका जताई जा रही है।
ईडी की यह कार्रवाई अवैध कोयला कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क, सप्लाई चेन और कथित लाभार्थियों तक पहुंचने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।












