शिक्षा विभाग: नयी ट्रांसफर नीति में सीनियरिटी को लेकर बड़ा प्रावधान
बिहार में इन दिनों शिक्षा विभाग की तरफ से जारी ट्रांसफर प्रक्रिया के बीच एक और खबर ने पूरे शिक्षक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

बिहार में इन दिनों शिक्षा विभाग की तरफ से जारी ट्रांसफर प्रक्रिया के बीच एक और खबर ने पूरे शिक्षक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शिक्षा विभाग की नई शिक्षक स्थानांतरण व्यवस्था में अंतर-जिला यानी एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेने वाले शिक्षकों की वरीयता यानी सीनियरिटी को लेकर बड़ा प्रावधान किया गया है।
नई व्यवस्था के मुताबिक, अगर कोई शिक्षक अपना जिला कैडर बदलकर दूसरे जिले में जाता है, तो उसे पुराने जिले की वरिष्ठता का लाभ नए जिले में उसी तरह नहीं मिलेगा। अंतर-जिला या अंतर-प्रमंडल स्थानांतरण के बाद उसकी वरीयता नए जिले या प्रमंडल में उसकी नियुक्ति वर्ष के कैडर के अनुसार निर्धारित की जाएगी। यानी पुराने जिले में जितने वर्षों की सेवा की है, वह वरिष्ठता नए कैडर में उसी क्रम में ट्रांसफर नहीं होगी। यही वजह है कि इस नियम को लेकर शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी चिंता वरिष्ठता सूची और प्रमोशन को लेकर है।
मसलन, अगर कोई शिक्षक अपने पुराने जिले में 10 या 15 साल की सेवा पूरी कर चुका है और पारिवारिक कारणों से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले में उसकी वरिष्ठता वहां के कैडर में उसके नियुक्ति वर्ष के आधार पर तय होगी। ऐसे में संभव है कि वह शिक्षक वहां पहले से कार्यरत किसी ऐसे शिक्षक से भी जूनियर हो जाए, जिसकी कुल सेवा अवधि उससे कम हो। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है, यह कहना कि शिक्षक की पूरी पुरानी सरकारी सेवा खत्म हो जाएगी या वह हर मामले में बिल्कुल नए कर्मचारी की तरह माना जाएगा, नियम की भाषा का सटीक अर्थ नहीं है। असल असर नए जिले के कैडर में उसकी वरीयता पर पड़ता है। इसका सीधा असर सीनियरिटी लिस्ट, प्रमोशन और वरिष्ठता आधारित अवसरों पर पड़ सकता है। इसलिए जो शिक्षक घर के करीब आने के लिए अंतर-जिला ट्रांसफर का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें आवेदन करने से पहले इस प्रावधान को ध्यान से समझना होगा।
बिहार सरकार ने बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026 लागू की है और इसके तहत शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। विभागीय पोर्टल ई-शिक्षाकोष के जरिए आवेदन और आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। अंतर-जिला या अंतर-प्रमंडल ट्रांसफर चाहने वाले शिक्षकों को अधिकतम 5 जिलों या 5 प्रमंडलों का विकल्प देने की सुविधा दी गई है। वहीं जिले के अंदर ट्रांसफर के लिए शिक्षक अधिकतम 30 स्कूलों का विकल्प दे सकते हैं। एक और अहम अपडेट यह है कि विभाग ने शुरुआती नियमों में बदलाव करते हुए पहली ट्रांसफर प्रक्रिया में पांच साल की न्यूनतम सेवा और परिवीक्षा से जुड़ी कुछ बाध्यताओं में छूट दी है। 28 जुलाई के अपडेट के बाद परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षक, प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक भी आवेदन कर सकेंगे।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रांसफर की प्रक्रिया इच्छुक शिक्षकों के आवेदन पर आधारित होगी और शिक्षक अपनी पसंद के स्कूलों का विकल्प दे सकेंगे। नई नीति के तहत शिक्षकों के लिए हर पांच साल पर ट्रांसफर की व्यवस्था भी बताई गई है। साथ ही, 31 मार्च 2026 तक 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके शिक्षकों को उनकी इच्छा के बिना ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। समान अंक होने की स्थिति में महिला शिक्षकों को गृह प्रखंड और पुरुष शिक्षकों को गृह जिला के आधार पर प्राथमिकता देने का प्रावधान भी बताया गया है।
अगर किसी शिक्षक के लिए परिवार, पति-पत्नी की पोस्टिंग, बच्चों की पढ़ाई या घर के करीब रहने की जरूरत ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो अंतर-जिला ट्रांसफर उसके लिए राहत हो सकता है। लेकिन अगर शिक्षक अपनी मौजूदा वरिष्ठता, भविष्य के प्रमोशन और कैडर में वरिष्ठ स्थिति को प्राथमिकता देता है, तो जिला बदलने से पहले नए जिले में वरिष्ठता कैसे तय होगी, इसे जरूर ध्यान में रखना चाहिए। यानी नई ट्रांसफर नीति में घर के करीब आने का रास्ता खुला है, लेकिन इसके साथ वरिष्ठता का एक बड़ा समझौता भी जुड़ा हुआ है। इसलिए आवेदन करने वाले हर शिक्षक के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि ट्रांसफर सिर्फ जिला बदलने का फैसला नहीं है, बल्कि यह आपके नए कैडर में वरिष्ठता और भविष्य के प्रमोशन की स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है।
पटना से अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट











