बिहार में महाघोटाला से हड़कंप, सॉफ्टवेयर में सेंधमारी कर 350 करोड़ का बालू घोटाला, रडार पर कई रसूखदार
बिहार में महाघोटाला सामने आया है। खनन विभाग में 350 करोड़ के बालू घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि जालसाजों ने डिजिटल सिस्टम से छेड़छाड़ कर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया।
बिहार में महाघोटाला सामने आया है। खनन विभाग में 350 करोड़ के बालू घोटाले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि जालसाजों ने डिजिटल सिस्टम से छेड़छाड़ कर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाया। खनन एवं भूतत्व विभाग के डिजिटल पोर्टल में छेड़छाड़ कर करीब 350 करोड़ रुपये मूल्य का अवैध तरीके से बालू बेचने का आरोप है। EOU की जांच में 100 से अधिक कारोबारी जांच के घेरे में हैं जबकि 17 जिलों में फैले नेटवर्क के तार सामने आए हैं। इस घोटाले को लेकर पटना के साइबर थाने में पहली एफआईआर अक्टूबर 2025 में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामले की कड़ियां खुलती चली गईं।
बिहार के खनन सॉफ्ट पोर्टल में छेड़छाड़ कर एनआईसी कर्मियों और 100 से अधिक कारोबारियों ने मिलकर 350 करोड़ रुपये का बालू घोटाला किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एनआईसी के कई कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य के 17 जिलों के 100 से ज्यादा वैध लाइसेंसधारी अब बिहार पुलिस के सीधे निशाने पर आ गए हैं। आरोप है कि कारोबारियों ने जिला खनन कार्यालय की स्वीकृति के बिना ही फर्जी दस्तावेज अपलोड किए और बालू उठाव की निर्धारित सीमा को सॉफ्टवेयर में बढ़वा लिया। इससे तय मात्रा से कहीं अधिक बालू का उठाव और कारोबार किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
दर्ज एफआईआर के अनुसार बालू कारोबारियों ने जिला खनन कार्यालय की मंजूरी के बिना ही खुद से फर्जी कागजात पोर्टल पर अपलोड कर दिए और बालू उठाने की तय मात्रा को अवैध रूप से सॉफ्टवेयर में बढ़वा लिया। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विभाग में तैनात एनआईसी कर्मियों की मिलीभगत से मोबाइल पर आने वाले ओटीपी ऑथेंटिकेशन के सुरक्षा नियम को पूरी तरह बाईपास यानी बंद कर दिया गया था। इसके बाद डेटाबेस सर्वर और मुख्य सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर 17 जिलों के धंधेबाजों ने सरकार को 350 करोड़ से अधिक का चूना लगा दिया। डेटाबेस और सॉफ्टवेयर में बदलाव कर अवैध तरीके से ई-चालान जारी किए गए और बड़े पैमाने पर बालू की बिक्री की गई।
मामले का खुलासा होने के बाद अक्टूबर 2025 में पटना साइबर थाने में पहली प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क राज्य के 17 जिलों तक फैला हुआ था और इसमें बड़ी संख्या में लाइसेंसधारी कारोबारी शामिल थे। फिलहाल इस मामले से जुड़े 17 जिलों में कुल 62 केस दर्ज किए गए हैं। आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कैसे की गई, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी खजाने को वास्तविक रूप से कितना नुकसान पहुंचा। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई तेज कर दी गई है। बताया जा रहा है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और कई प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।