नदी पार बसे गांवों में पहुंची स्वास्थ्य सेवा, जांच के साथ लौटी भरोसे की रोशनी

किशनगंज: किसी गांव के लिए स्वास्थ्य केंद्र की दूरी केवल किलोमीटर में नहीं मापी जाती। नदी, आवागमन की कठिनाई और सीमित साधनों के बीच कई बार कुछ किलोमीटर की दूरी भी बीमारी की स्थिति में बड़ी चुनौती बन जाती है। किशनगंज के नदी पार बसे कुछ गांवों के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच ऐसी ही चुनौती रही है। अब जिला प्रशासन ने इस दूरी को कम करने की पहल की है। प्रशासन का प्रयास है कि स्वास्थ्य सुविधा के लिए लोगों को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों से समझौता न करना पड़े, बल्कि स्वास्थ्य सेवा ही उनके गांव तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से दिघलबैंक प्रखंड के सिंघीमारी क्षेत्र और ठाकुरगंज प्रखंड के दल्लेगाँव में साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविर की शुरुआत की गई है। आज दोनों स्थानों पर आयोजित शिविर में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई तथा एनसीडी एवं टीबी स्क्रीनिंग, टीकाकरण और आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। गांव में ही स्वास्थ्यकर्मियों की टीम और जांच की सुविधा मिलने से ग्रामीणों में उत्साह और राहत का माहौल रहा।
शिविर में जांच कराने के बाद रफीकुल ने कहा कि पहले स्वास्थ्य जांच के लिए नदी पार करके बाहर जाना पड़ता था। घर के काम और आने-जाने की परेशानी के कारण कई बार जांच टल जाती थी। आज जब स्वास्थ्यकर्मी हमारे गांव में ही जांच करने पहुंचे तो बहुत अच्छा लगा। अब बीमारी होने का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच करा सकेंगे। वहीं रमेश ने कहा कि हमारे गांव में इस तरह का शिविर लगेगा, यह पहले सोचा नहीं था। आज यहीं स्वास्थ्य जांच हो गई। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि बुजुर्गों और महिलाओं को दूर जाने की परेशानी नहीं होगी। अगर यह शिविर नियमित लगता रहे तो गांव के लोगों को बहुत सहूलियत मिलेगी।
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्धारित व्यवस्था के अनुसार दिघलबैंक प्रखंड में उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पलसा में प्रत्येक मंगलवार तथा आंगनबाड़ी केंद्र, बैद्यनाथ पलसा में प्रत्येक शनिवार स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। वहीं ठाकुरगंज प्रखंड के मनरेगा भवन, दल्लेगाँव में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार शिविर लगाया जाएगा। शिविरों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, एएनएम और आशा फैसिलिटेटर की टीम मौजूद रहेगी। स्वास्थ्यकर्मी आवश्यक दवा और उपकरण के साथ सेवाएं देंगे। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीणों को शिविर की जानकारी दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग जांच और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ मुनाजिम ने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है। गैर-संचारी रोगों और टीबी की स्क्रीनिंग के माध्यम से संभावित मरीजों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने का प्रयास किया जाएगा। टीकाकरण और आवश्यक चिकित्सकीय सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। जांच के दौरान किसी व्यक्ति में गंभीर बीमारी या आगे की जांच की आवश्यकता सामने आने पर उसे उपयुक्त स्वास्थ्य संस्थान तक रेफर किया जाएगा।इस व्यवस्था से स्वास्थ्य विभाग को ऐसे लोगों तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी, जो दूरी या आवागमन की समस्या के कारण नियमित रूप से स्वास्थ्य संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण किसी गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा से वंचित नहीं होना चाहिए। इसी सोच के साथ नदी पार बसे गांवों में नियमित स्वास्थ्य शिविर की व्यवस्था की गई है।उन्होंने कहा कि गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से समय पर जांच और बीमारी की पहचान संभव होगी। प्रशासन का प्रयास है कि लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय न करनी पड़े और सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उन परिवारों तक भी पहुंचे, जो दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं।
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के अधिकतम निकट उपलब्ध हों। नदी पार बसे क्षेत्रों के लिए निर्धारित साप्ताहिक शिविर इसी दिशा में उठाया गया कदम है। शिविर में जांच, टीकाकरण, एनसीडी एवं टीबी स्क्रीनिंग सहित आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।उन्होंने कहा कि संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य पदाधिकारियों को दवा, उपकरण एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिविरों का नियमित निरीक्षण भी किया जाएगा, ताकि सेवा की निरंतरता और गुणवत्ता बनी रहे।
किशनगंज से इमामुद्दीन की रिपोर्ट










