खाद की कालाबाजारी, बिजली व सिंचाई की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ किसानों का हल्लाबोल, भोरे प्रखंड कार्यालय पर गरजे किसान
खाद की किल्लत, डीएपी व यूरिया की कालाबाजारी, मनमानी कीमतों पर खाद की बिक्री, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी व कृषि कार्य के लिए बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परेशान किसानों ने शुक्रवार को भोरे प्रखंड कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

भोरे/गोपालगंज : खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं को लेकर किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखने लगा है। खाद की किल्लत, डीएपी और यूरिया की कालाबाजारी, मनमानी कीमतों पर खाद की बिक्री, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी और कृषि कार्य के लिए बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परेशान किसानों ने शुक्रवार को भोरे प्रखंड कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय किसान महासभा की प्रखंड इकाई के बैनर तले आयोजित इस धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार और प्रशासन से उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग उठाई।
खेती-किसानी आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है - किसान महासभा
धरना-प्रदर्शन के माध्यम से किसान महासभा ने स्पष्ट किया कि खेती-किसानी आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। आलू, मक्का और गेहूं की बुवाई का महत्वपूर्ण समय चल रहा है, लेकिन किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बाजार में डीएपी और यूरिया की किल्लत के कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि खाद की कमी का फायदा उठाकर कुछ दुकानदारों द्वारा कालाबाजारी और मनमानी कीमत वसूली जा रही है। इससे पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे किसानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
DAP 1350 रुपए में उपलब्ध कराने की मांग
किसान महासभा ने मांग की कि डीएपी और यूरिया खाद की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा किसानों को डीएपी खाद 1350 रुपए में उपलब्ध कराई जाए। खाद वितरण के नाम पर ऑनलाइन प्रक्रिया और जमीन की रसीद दिखाने की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग की गई। संगठन के नेताओं का कहना था कि खेती के समय किसानों को खाद के लिए अनावश्यक कागजी प्रक्रिया में उलझाना उचित नहीं है। किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार आसानी से खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
धान खरीद में पारदर्शिता और नगद भुगतान की मांग
धरना-प्रदर्शन में सरकारी धान खरीद व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई गई। किसान महासभा के नेताओं ने कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार धान की खरीद के लिए व्यापार मंडल और पैक्स के माध्यम से समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसानों को धान का उचित सरकारी समर्थन मूल्य मिले और बिक्री के बाद नगद भुगतान की व्यवस्था हो। वक्ताओं ने कहा कि बिचौलियों और अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में परेशानी होती है। इसलिए धान खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी और किसान हितैषी बनाया जाना जरूरी है।
निजी बोरिंग तक बिजली और कृषि कनेक्शन देने की मांग
किसानों ने कृषि कार्य के लिए बिजली की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि कई किसानों के खेतों तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंचने के कारण सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। किसान महासभा ने प्रत्येक निजी बोरिंग तक बिजली का पोल और तार पहुंचाने तथा कृषि कार्य के लिए किसानों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की गारंटी देने की मांग की।
सरकारी नलकूपों और नहरों की मरम्मत कराने की मांग
सिंचाई व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। संगठन ने कहा कि सरकारी नलकूपों की बदहाली और नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से किसानों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई जगह सिंचाई के सार्वजनिक संसाधन ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को महंगे निजी साधनों से खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है। किसान महासभा ने सभी सरकारी नलकूपों एवं नहरों की मरम्मत कराने और नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की गारंटी देने की मांग की।
कई किसान नेताओं ने किया संबोधित
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता किसान महासभा के पूर्व जिला अध्यक्ष कामरेड लाल बहादुर सिंह ने की, जबकि संचालन भाकपा माले के जिला कमेटी सदस्य कामरेड धर्मेंद्र चौहान ने किया। सभा को संबोधित करते हुए कामरेड बजरंग बली कुशवाहा, रौशन राज, माधव प्रसाद बर्नवाल, किसान महासभा के जिला संयोजक कामरेड संतराज सिंह, किसान महासभा के प्रखंड संयोजक सह डोमनपुर पंचायत के मुखिया कमलेश प्रसाद, रामाधार सिंह, रवींद्र भगत, सुरेंद्र सिंह, खेग्रामस के फुलचन भारती, जिला परिषद सदस्य ललिता चौहान और विजय राम सहित कई नेताओं ने अपनी बातें रखीं।
'किसानों की समस्याओं को केवल आश्वासन देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता'
वक्ताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं को केवल आश्वासन देकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसान देश और समाज की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसके बावजूद खाद, बीज, बिजली और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में किसानों की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो तेज होगा आंदोलन
किसान महासभा ने प्रशासन से पांच सूत्री मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए अविलंब आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की जायज मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की गई तो किसान महासभा किसानों के व्यापक हित में आंदोलन को और व्यापक एवं तेज करने के लिए बाध्य होगी। धरना-प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने साफ संदेश दिया कि खाद, बिजली, सिंचाई और फसल के उचित मूल्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना खेती को संकट से बाहर निकालना संभव नहीं है। किसानों ने इन समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की।
भोरे (गोपलागंज) से रिपोर्ट











