भागलपुर: विक्रमशिला सेतु पर फिर दौड़ने लगीं गाड़ियां, खिल उठे लाखों चेहरे, 35 दिन बाद बेली ब्रिज से शुरू हुआ आवागमन

विक्रमशिला सेतु पर करीब 35 दिनों बाद वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो गया। गंगा नदी पर उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर रविवार से वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो गया।

भागलपुर: विक्रमशिला सेतु पर फिर दौड़ने लगीं गाड़ियां, खिल उठे लाखों चेहरे, 35 दिन बाद बेली ब्रिज से शुरू हुआ आवागमन
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: Jun 07, 2026, 12:07:00 PM

विक्रमशिला सेतु पर करीब 35 दिनों बाद वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो गया। गंगा नदी पर उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर रविवार से वाहनों का परिचालन फिर से शुरू हो गया। तीन मई की मध्यरात्रि को पुल का एक बड़ा स्लैब पानी में गिर जाने के बाद से इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया था।  

आज सुबह बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने पुल पर नवनिर्मित बेली ब्रिज का फीता काटकर औपचारिक उद्घाटन किया। इसके तुरंत बाद, आम लोगों और हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए सेतु को आवागमन के लिए खोल दिया गया। 

पिछले 35 दिनों से भीषण जाम और आवागमन ठप होने की मार झेल रहे स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है। इस मार्ग पर आवागमन बाधित होने से कोसी-सीमांचल समेत पूर्वी बिहार और आसपास के क्षेत्रों का संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ था। वर्तमान में आवागमन के लिए कुछ नियमों के साथ आम लोगों के लिए सेतु खोल दिया गया है और फिलहाल सेतु पर वन-वे लागू रहेगा। इसके साथ ही खास यह कि इस पुल की रोजना ड्रोन से मॉनिटरिंग की जाएगी। 

इस मार्ग से केवल छोटे एवं मध्यम श्रेणी के वाहन, जिनकी भार वहन क्षमता अधिकतम 10 टन होगी, परिचालित किए जाएंगे। आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रैकर, मैजिक, छोटे यात्री वाहन तथा पिकअप वैन जैसे हल्के मालवाहक वाहनों को प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। जिलाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार वर्तमान में संचालित सभी नाव सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क रहेंगी। नाव संचालकों को होने वाले व्यय एवं क्षति की प्रतिपूर्ति प्रशासन द्वारा की जाएगी। 

यातायात व्यवस्था को सुचारू एवं सुरक्षित बनाए रखने के लिए सेतु के दोनों छोरों महादेवपुर घाट एवं बरारी घाट पर दंडाधिकारी, पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तथा क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की तैनाती की गई है। पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों एवं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम से की जाएगी। यातायात संचालन के लिए वन-वे प्रणाली लागू की जाएगी तथा रेड एवं ग्रीन सिग्नल आधारित ट्रैफिक लाइट व्यवस्था का उपयोग किया जाएगा। पुलिस बल की तैनाती तीन पालियों में की जाएगी, ताकि चौबीसों घंटे प्रभावी निगरानी एवं नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

बता दें कि बीते 3 मई की रात को विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 2 और 3 के बीच का एक बड़ा आरसीसी स्लैब अचानक टूटकर धंस गया था।  सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत भारी और हल्के वाहनों की एंट्री बैन कर दी थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से मदद मांगी, जिसके बाद देश की सबसे जांबाज निर्माण विंग बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) को मोर्चे पर उतारा गया।बीआरओ की 100 सदस्यीय विशेष इंजीनियरों और जवानों की टीम ने इस भारी-भरकम काम को एक मिशन के रूप में लिया। बीआरओ के जांबाजों ने महज 35 दिनों के भीतर पूरे मलबे को साफ कर वहां एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार मजबूत बेली ब्रिज असेंबल कर खड़े कर दिए।