सप्तमी को मां आरण्य देवी के दर्शन के लिए उमड़ी आस्था, हजारों की संख्या में भक्तों ने माता के दरबार में टेका मत्था
आरा। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शनिवार को देवी दुर्गा के सप्तम स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। सप्तमी तिथि को पूजन करने के लिए पूजा पंडालों एवं मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ी रही।

आरा। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन शनिवार को देवी दुर्गा के सप्तम स्वरूप कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। सप्तमी तिथि को पूजन करने के लिए पूजा पंडालों एवं मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ी रही। आरा की अधिष्ठात्री देवी मां आरण्य देवी के मंदिर में पूजन एवं दर्शन को लेकर शनिवार की अहले सुबह से ही महिला-पुरुष श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही।
हजारों की संख्या में महिला-पुरुष भक्तों ने माता के दरबार में माथा टेक कर पूजा-अर्चना की। इसके पूर्व मां आरण्य देवी के मंदिर में कोलकाता के सुप्रसिद्ध फूल-श्रृंगार के कारीगर द्वारा आकर्षक सजावट एवं माता का श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात शनिवार की सुबह साढे़ 4 बजे मंगला आरती हुई, जिसमें मां आरण्य देवी मंदिर विकास ट्रस्ट के पदाधिकारी, सदस्य एवं मारवाड़ी समाज के लोग सहित सैकड़ों की संख्या में लोग सम्मिलित हुए। मंगला आरती के पश्चात भक्तो के बेसन से निर्मित बुंदिया का प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान भक्तों ने मंदिर निर्माण को लेकर दिल खोलकर दान व सहयोग किया।
अष्टमी, नवमी एवं दशमी को मंदिर में भक्तों का प्रवेश भैरव बाबा के बगल वाली गली से होगा
मां आरण्य देवी की मूर्ति एवं पूरे मंदिर परिसर को फुलो से आकर्षक ढ़ंग से सजाया गया था। वही माता का भी भव्य श्रृंगार किया गया है। जो श्रद्वालुओ को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मां की दर्शन के लिए भैरव बाबा के मंदिर से भक्तों को प्रवेश कराया जा रहा था। दर्शन के उपरांत भक्तों को मुख्य द्वार से निकाला जा रहा था। पुलिस-प्रशासन की टीम, मां आरण्य देवी मंदिर विकास ट्रस्ट के पदाधिकारी, स्टाफ एवं स्थानीय वोलिंटियर लोगों को कतारबद्व कराकर मां आरण्य देवी के दर्शन करा रहे थे।
मां की भक्ति गीतों से पूरा माहौल गुंजायमान हो गया। भक्त आरण्य देवी मैया की जय, सच्चे दरबार की जय के जयकारे लगा रहे थे। अष्टमी, नवमी तिथि को मां के मंदिर में भक्तों एवं श्रद्धालुओं का प्रवेश भैरव बाबा मंदिर के ठीक बगल वाले रास्ते से होगा। देवी दर्शन के उपरांत भक्तो का निकास मुख्य द्वार से होगा। भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में महिला-पुरुष भक्तों को नारियल फोड़ने एवं दीप-अगरबत्ती जलाने की सख्त मनाही है।













