अमेरिका : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वीजा के लिए एक लाख डॉलर की भुगतान शर्त को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। यह व्यवस्था अब 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेगी। हालांकि, नियम सभी H-1B मामलों पर एक जैसे लागू नहीं होंगे और इसमें कुछ अपवाद भी रखे गए हैं।
फैसला H-1B वीजा प्रोग्राम में गलत इस्तेमाल को रोकने व अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा के मकसद से लिया गया है - व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह फैसला H-1B वीजा प्रोग्राम में गलत इस्तेमाल को रोकने और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा के मकसद से लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि कुछ आईटी स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियां कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों की जगह भर रही थीं।
एक लाख डॉलर की फीस क्यों बढ़ाई गई?
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में कुछ नए H-1B आवेदनों पर एक लाख डॉलर का भुगतान अनिवार्य किया था। 18 सितंबर 2026 के नए आदेश में इस व्यवस्था को अगले 12 महीने के लिए जारी रखा गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह नियम खास तौर पर उन नए H-1B कर्मचारियों पर लागू होता है जो अमेरिका के बाहर हैं और जिनके लिए नई H-1B याचिका दाखिल की जा रही है। व्हाइट हाउस का दावा है कि 2025 में यह व्यवस्था लागू होने के बाद बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा दाखिल H-1B रजिस्ट्रेशन में करीब 92 प्रतिशत की कमी आई है। प्रशासन इसे कम वेतन वाले और कम-कुशल H-1B कर्मचारियों की भर्ती में कमी के तौर पर देख रहा है।
किन H-1B आवेदकों पर लागू नहीं होगी एक लाख डॉलर की शर्त?
नए आदेश में कुछ महत्वपूर्ण अपवाद हैं। मौजूदा H-1B धारकों के सामान्य रिन्यूअल पर यह शर्त लागू नहीं होती। इसी तरह अमेरिका में पहले से मौजूद ऐसे लोगों के मामले में भी अलग नियम हैं जो छात्र वीजा से H-1B स्टेटस में बदल रहे हैं। व्हाइट हाउस के नए आदेश में मुख्य तौर पर उन H-1B कर्मचारियों पर रोक की व्यवस्था है जो अमेरिका के बाहर हैं और नई H-1B याचिका के आधार पर अमेरिका में प्रवेश करना चाहते हैं। राष्ट्रीय हित में अमेरिकी सरकार कुछ मामलों में इस भुगतान से छूट भी दे सकती है।