लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी के लिहाज से बडी खबर है। मिली जानकारी के अनुसार पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को फिर पार्टी से निकाल दिया है। पिछले करीब सवा दो साल में यह सातवां मौका है, जब मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर करने, उनको वापस लेने या पार्टी से जोडने की पहल की है। इसके अलावा मायावती ने आकाश के ससुर को लेकर भी बड़ा बयान दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार मायावती ने राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले बड़ा फैसला लिया। दरअसल मायावती ने गुरुवार को अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में संयोजक के पद से हटा दिया। इसके पीछे उन्होंने कारण बताया कि आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा में देरी की। उनका यह भी कहना था कि अशोक सिद्धार्थ की घोषणा में देरी इस बात की तरफ ईशारा करता है कि उनका बसपा की बेहतरी की जगह आकाश के प्रति लगाव ज्यादा दिखता है। मायावती के इस फैसले के बाद से बसपा में चल रहा सियासी घमासान अब चरम पर पहुंच गया है।
दरअसल मायावती ने बुधवार को ही अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक लंबा चौडा पोस्ट किया। उन्होंने यह लिखा कि आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ अगर राजनीति से संन्यास लेते हैं तो आकाश को दोबारा पद देने पर विचार किया जा सकता है। मायावती द्वारा इस पोस्ट को किए जाने के 24 घंटे के अंदर अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार को सन्यास का ऐलान कर दिया। हालांकि अहम बात यह कि अशोक सिद्धार्थ के इस ऐलान की कुछ ही देर के बाद मायावती ने एक और पोस्ट की। इस पोस्ट में उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त करने की भी घोषणा कर दी। उनका कहना था कि अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास का ऐलान करने में बहुत देरी की। मायावती का यह भी कहना था कि राजनीति से सन्यास लेने का अशोक सिद्धार्थ का फैसला देर आए, दुरुस्त आए है। अगर अशोक सिद्धार्थ को अपने दामाद के उज्जवल भविष्य की चिंता होती तो वह तुरंत संन्यास लेते। उन्होंने सन्यास लेने की बात को बताने में देरी की। इससे यह पता चलता है कि उनकी नियत में खोट है।
वही आकाश आनंद को पार्टी से निकालने की बात पर उन्होंने लिखा कि आकाश पार्टी और आंदोलन के हित की कम और रिश्ते नातों की परवाह ज्यादा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बीएसपी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं? इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक तीन सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। उन्हें पार्टी से पूरे तरीके से मुक्त किया जाता है।
हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किया गया है। पिछले सवा दो सालों में सात बार मायावती ने आकाश आनंद को लेकर के अंदर लाने, बाहर करने, उन्हें फिर से पार्टी से जोड़ने, हटाने का फैसला लिया है। दो साल पहले संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में मायावती ने आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर की बड़ी जिम्मेदारी दी थी और उनको अपना उत्तराधिकारी भी बताया था। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद ही मायावती ने उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया था और उत्तराधिकारी वाला पद भी छीन लिया था। तब मायावती ने उन्हें अपरिपक्व बताया था।