लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव से पहले एक बार फिर से बंटेंगे और कटेंगे को लेकर विरोधी दलों पर निशाना साधा है। बीजेपी कार्यसमिति का बैठक में उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर बांटने वालों से सतर्क रहें, बटेंगे नहीं तो कटेंगे भी नहीं। सीएम ने कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की उपलब्धियों को बूथ स्तर तक ले जाएं और सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे नकारात्मक नैरेटिव का तथ्यों के साथ जवाब दें।
CM योगी ने कहा- जाति के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों से सतर्क रहना होगा
लखनऊ में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में सीएम योगी ने कहा कि जाति के नाम पर समाज को बांटने वाले लोगों से सतर्क रहना होगा। विखंडन करने वाले लोग बांटने में विश्वास करते हैं और बांटने के कारण ही काटने में सफल होते हैं। इसलिए हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि बटेंगे नहीं तो कटेंगे भी नहीं।
योगी ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन लोगों ने राम भक्तों पर गोलियां चलवाई उन्हें अयोध्या के विकास की बात करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने 30 अक्टूबर 1990 की घटना का जिक्र कर कहा कि ये तारीख भाजपा और रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। जब सपा सरकार ने रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं। उन्होंने कहा कि अगर उस वक्त कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया होता तो क्या आज भव्य राम मंदिर का निर्माण हो पाता? राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी आज अयोध्या के विकास की बात करती है, जबकि अयोध्या के विकास में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हमेशा बाधा बनी रहीं।
कांग्रेस-सपा ने गरीबों को केवल वोट बैंक समझा - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 2014 से पहले देश में गरीबी, भ्रष्टाचार, असुरक्षा, अव्यवस्था और पहचान का संकट था। गरीब कांग्रेस के लिए केवल वोट बैंक था। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की तस्वीर बदली है। भारत, दुनिया की टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। गरीबों को आवास, शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, आयुष्मान कार्ड, जनधन खाते और मुफ्त राशन जैसी सुविधाएं मिली हैं। सीएम योगी ने कहा कि सपा सरकार में माफिया को संरक्षण दिया जाता था। भर्ती प्रक्रिया में सैफई सिंडिकेट और चाचा-भतीजे की वसूली व्यवस्था हावी रहती थी। योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलती थी और हर भर्ती पर न्यायालय की रोक लग जाती थी। लेकिन, अब भर्ती में सिफारिश नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत को महत्व मिलता है।