फरक्का बराज और गंगा में बढ़ती गाद को लेकर बिहार में सियासी बवाल मचा हुआ है। बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने 1996 में हुए भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते का जिक्र करते हुए लालू यादव पर हमला बोला है। विजय चौधरी ने कहा-उस समय बिहार में लालू यादव मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। विजय चौधरी ने आरोप लगाया कि उस समय बिहार के हितों की अनदेखी करते हुए समझौता किया गया था। अब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पलटवार किया है और कहा है कि एक दशक बाद आई भीषण बाढ़ में जब बिहार सरकार का खजाना खाली है, राजकोषीय तनाव चरम पर है तब मुझे मेरा सड़क से सदन तक का संघर्ष याद आ रहा है।
आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने वीडियो के साथ फेसबुक पोस्ट कर जवाब दिया है और अपने संघर्ष के दिनों को याद किया है। लालू यादव ने लिखा है-एक दशक बाद आई भीषण बाढ़ में जब बिहार सरकार का खजाना खाली है, राजकोषीय तनाव चरम पर है तब मुझे मेरा सड़क से सदन तक का संघर्ष याद आ रहा है।
लालू यादव जितना पक्ष-विपक्ष में रहकर बिहार और बिहारियों के हक के लिए लड़ा है उतना आज तक कोई नहीं लड़ा। अटल जी की कैबिनेट में एक दर्जन कैबिनेट मंत्री बिहार से थे लेकिन राज्य में मेरी सरकार थी तो इन नकारे नकारात्मक सांप्रदायिक भाजपाइयों ने बिहार को उसके हिस्से का बजट कभी नहीं दिया, कुछ नहीं दिया और ना ही देने दिया। पंचवर्षीय योजना तक में रोक लगा देते थे कि बिहार को पैसा ना मिले। उस वक्त राज्य सीधे उधार भी नहीं ले सकते थे।
लालू यादव लिखते हैं-𝟐𝟎𝟎𝟒 में जब हम राजद के 𝟐𝟒 सांसदों के साथ रुआब के साथ 𝐔𝐏𝐀-𝟏 में रेल मंत्री बने तो बिहार को उन पाँच वर्षों (𝟐𝟎𝟎𝟒-𝟎𝟗) में अपने प्रभाव और राजनीतिक ताक़त के बल पर 𝟏 लाख 𝟒𝟒 हज़ार करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि तत्कालीन प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी जी से विकास कार्यों के लिए दिलाई। हमने जो कहा उन्होंने किया।
हमारे उसी पैकेज की धनराशि से 𝟐𝟎𝟎𝟓 से नीतीश ने रगड़-रगड़ कर अपना चेहरा चमकाया। अटल जी के मंत्रिमंडल में रहते नीतीश समेत बिहार से एक दर्जन कैबिनेट मंत्रियों ने हमें बदनाम और विफल करने के लिए केंद्र से कभी कोई सहायता नहीं दिलाई लेकिन हम तो सकारात्मक दृष्टिकोण से बिहार हित में सदैव राजनीति करते रहे और बिहार को बहुत फंड दिलाया तो 𝐁𝐉𝐏 के दुलारे नीतीश जैसों ने व्यक्तिगत स्वार्थ में हमेशा बिहार को दंड दिलाया। एनडीए से 𝟑𝟎 सांसदों के बावजूद आज दिल्ली में बिहार की सुनने वाला कोई नहीं?
नेपाल से आने वाली बाढ़ और उसके स्थायी समाधान के लिए हमेशा प्रयासरत रहा। लालू सत्ता के लिए अपना चरित्र, चेहरा, चाल और विचार नहीं बदलता। संसद का वीडियो है ध्यान से सुनिए, 𝟐𝟎𝟏𝟏 का है तब केंद्र में 𝐔𝐏𝐀-𝟐 की सरकार थी, बिहार में नीतीश-बीजेपी की सरकार थी लेकिन लालू दिल्ली में बिहार के लिए 𝐔𝐏𝐀 से भी लड़ता था। अब दिल्ली में 𝐍𝐃𝐀 -𝟑 है, बिहार में 𝐍𝐃𝐀-𝟓 है लेकिन निकम्मे, नकारे और नौसिखिए लोग बहाने बनाने से बाज नहीं आते।
👉नदियों के रख रखाव के लिए नेपाल सरकार से दो टूक बात हो, कर्पूरी ठाकुर जी ने भी इस मुद्दे को उठाया था।
👉चुनाव और बाढ़ आने पर मुफ्तखोरी का घोषणा और फ्री 𝟐 किलो अनाज का लालच देना बंद करो, स्थाई समाधान दो।
👉नदियों के रखरखाव पर खर्च होने वाला एक पैसा बिहार को नहीं मिला
👉बिहार का लोग अपना घर परिवार छोड़ देश विदेश पलायन करता है। वहां से खून पसीना का कमाई लाकर यहां जमा करता है, लेकिन उसके अनुपात में उनपर खर्च नहीं होता
👉हम भीख नहीं मांग रहे हैं, क्रेडिट के अनुरूप पैसा बिहार को दो।
👉बिहार का 𝐂𝐃𝐑 (Credit Deposit Ratio कम क्यों है? आज भी देश में साख-जमा अनुपात बिहार का सबसे कम है?