पटना: राज्य के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले शिवानंद तिवारी में राज्य में जारी पूर्ण रूप से शराबबंदी पर बड़ा बयान दिया है। तिवारी ने कहा है कि जब शराबबंदी सफल नहीं होता है तो पैर पीछे खींच लेना ही बुद्धिमानी है। तिवारी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट कर के यह बातें कही है।
तिवारी ने लिखा है कि जमुई की घटना के अपराधी शराब के तस्कर निकले। नीतीश कुमार जब सत्ता में आए तो उन्होंने आबकारी नीति में बड़ा बदलाव किया। उस नीति का क्या प्रभाव पड़ा, इसे समझने के लिए आबकारी विभाग के राजस्व के आँकड़ों के आधार पर भी आकलन किया जा सकता है। नीतीश कुमार के पहले राबड़ी देवी का मंत्रिमंडल था। उस मंत्रिमंडल में मैं ही आबकारी विभाग का मंत्री था। राबड़ी सरकार के समय आबकारी विभाग से सरकार के ख़ज़ाने में 319 करोड़ प्राप्त होता था। जब नीतीश कुमार की सरकार आई तो उसने आबकारी की पुरानी नीति में बड़ा बदलाव किया, इससे बिहार में शराब से मिलने वाला राजस्व बढ़कर लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया हो गया। यह आँकड़ा अपने आप में बताता है कि किस तरह शराब की उपलब्धता का विस्तार हुआ और शराब घर-घर तक पहुँचने लगी। यहाँ तक कि पारचून की दुकानों पर भी शराब मिलने लगा।
उन्होंने यह भी लिखा है कि इसका सामाजिक प्रभाव पड़ा। घरों से महिलाओं का निकलना मुश्किल होने लगा। महिलाओं की ओर से इसका विरोध हुआ। मुजफ्फरपुर में नीतीश कुमार की सभा में महिलाओं ने विरोध किया। विरोध करते हुए यह सवाल भी उठाया कि जब शराब की वजह से परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। नीतीश कुमार ने जवाब में कहा कि ये जो लड़कियों को साइकिल दी जा रही है, पोशाक दिया जा रहा है इसका पैसा कहाँ से आएगा ?
इसके बाद नीतीश कुमार ने महसूस किया कि महिलाएं उनके खिलाफ होती जा रही हैं। चुनाव में इसका नुक़सान होगा। उन्होंने बग़ैर सोचे विचारे देशी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध की घोषणा कर दी। सुशील मोदी ने व्यंग्य किया कि केवल देसी शराब पर ही रोक क्यों, अंग्रेजी शराब पर क्यों नहीं? इसके बाद नीतीश जी का दूसरा आदेश निकला और बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हो गई।
उन्होंने आगे यह भी लिखा है कि नीतीश जी के इस आदेश से एक शून्य बन गया। जिसको भरने के लिए शराब माफिया मैदान में आ गए। आज ये इतने ताकतवर हो गए हैं कि पुलिस भी इनसे डरती है। ग्रामीण इलाक़े में सूखे नशे का प्रचलन बढ़ गया है। लड़के बरबाद हो रहे हैं। इसलिए सरकार से अनुरोध है कि वह सर्वदलीय बैठक बुलाए और इस मसले पर आम राय बनाने की कोशिश करे। नीतीश कुमार ने शराबबंदी का प्रयोग किया लेकिन वह प्रयोग सफल नहीं हुआ बल्कि उससे नुक़सान हो रहा है। कोई भी सरकार या व्यक्ति भले के लिए कोई प्रयोग करता है। अगर सफल नहीं होता है तो पैर पीछे खींच लेना ही बुद्धिमानी है।