मोकामा विधायक अनंत सिंह की विधायकी पर संकट मंडरा रहा है। जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी सिलसिले में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा विधानसभा पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष को अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा से संबंधित पत्र सौंपा। जेडीयू की ओर से सौंपे गए अनुशंसा पत्र के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।
दरअसल जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा सोमवार को विधानसभा पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष को अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा से संबंधित पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने अपने पक्ष में 10 पन्नों के दस्तावेजी सबूत के साथ वीडियो भी सौंपे। बताया गया कि पत्र के साथ 10 पन्नों के सबूत और वीडियो भी दिए गए हैं। जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष की ओर से सौंपे गए पत्र और दस्तावेजों के बाद अब इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
जेडीयू की ओर से उठाए गए इस कदम को अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता के मामले में काफी अहम माना जा रहा है। अनंत सिंह को जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद पार्टी की ओर से उनकी विधायकी समाप्त करने की पहल तेज हो गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा अध्यक्ष सौंपे गए दस्तावेजों और वीडियो की समीक्षा के बाद क्या कदम उठाते हैं। हालांकि, अनुशंसा पत्र सौंपे जाने भर से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती। इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष लेंगे।
बता दें कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में अनंत सिंह ने जदयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार का खुलकर विरोध किया। उन्होंने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ जाकर विरोधी उम्मीदवार (अनुज सिंह) के पक्ष में प्रचार किया। जिसके बाद जदयू ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा द्वारा जारी आदेश के तहत निष्कासन के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की भी अनुशंसा की गई है।