राम मंदिर दान पर बढ़ी कानूनी घेराबंदी, सुप्रीम कोर्ट ने SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

राम मंदिर दान पर बढ़ी कानूनी घेराबंदी, सुप्रीम कोर्ट ने SIT से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 13, 2026, 5:29:00 PM

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की निगरानी में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण की जांच कर रही उत्तर प्रदेश की विशेष जांच टीम (SIT) से अब तक की जांच की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से भी जवाब तलब किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल हैं, ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि एसआईटी की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की जाएगी और उन्होंने केंद्र व राज्य की ओर से नोटिस भी स्वीकार किया।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत का ध्यान इस बात की ओर दिलाया गया कि मंदिर परिसर से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं ताकि जांच प्रभावित न हो। एक अन्य पक्ष ने यह भी मांग की कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल की जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट की प्रति उन्हें उपलब्ध कराई जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया और कहा कि जांच अभी जारी है तथा इस विषय पर उचित समय पर विचार किया जाएगा।

मामले में दायर प्रमुख याचिकाओं में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने अपने-अपने पक्ष में दायर याचिकाओं के माध्यम से आरोप लगाया है कि राज्य की एजेंसियों से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की अपेक्षा करना कठिन है। इसलिए पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।

याचिकाओं में यह भी आग्रह किया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 5 फरवरी 2020 को अपने गठन के बाद से प्राप्त सभी प्रकार के दान का विस्तृत लेखा-जोखा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। इसमें नकद चढ़ावा, बैंक और डिजिटल माध्यम से प्राप्त राशि, विदेशी योगदान, सोना, चांदी, आभूषण तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के साथ-साथ उनके रखरखाव, लेखांकन और उपयोग का पूरा विवरण शामिल करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थानों में जनता के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।

इसी मामले में दायर एक अन्य याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह घोषणा करने का अनुरोध किया गया है कि रामलला को श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित नकद, आभूषण, सोना, चांदी, डिजिटल दान और अन्य मूल्यवान वस्तुएं ट्रस्ट की संरक्षित धार्मिक संपत्ति हैं। इसलिए इनके प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीय व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी, जहां एसआईटी की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर अदालत आगे की दिशा तय कर सकती है।