देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने ध्वजारोहण में प्रधानमंत्री की सहायता की। अपने लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य, राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, युवाओं की भूमिका और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्थिति सहित कई मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य 1.4 अरब देशवासियों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाना है। उन्होंने विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया और कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा देश की स्थिरता, लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था और संविधान की ताकत से जुड़ी है।
स्वतंत्रता दिवस के माहौल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में तिरंगा शान से लहरा रहा है और ‘वंदे मातरम’ का भाव लोगों के भीतर दिखाई दे रहा है। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने और विकसित भारत 2047 की यात्रा में युवा शक्ति की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद और माओवाद को लेकर कहा कि दशकों से चली आ रही इस चुनौती ने बड़ी संख्या में युवाओं और परिवारों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था और अब नक्सली हिंसा कमजोर पड़ चुकी है।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने चेताया कि हथियारबंद उग्रवाद के कमजोर होने के बावजूद माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाली मानसिकता से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने इसे ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए युवाओं को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वीकार्यता और सम्मान बढ़ रहा है। उन्होंने भारत के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए MSME क्षेत्र से वैश्विक बाजार के अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारतीय वस्त्र, मशीनरी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के बाद पैदा हुए वैश्विक संकट और यूक्रेन तथा पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने पूर्व की तैयारियों और रणनीतिक फैसलों के आधार पर संकटों का सामना किया।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस की खोज पर जोर दिया। उन्होंने दावा किया कि देश के समुद्री क्षेत्र के 99 प्रतिशत हिस्से को पहले ‘नो-गो’ क्षेत्र माना जाता था, जिसे अब ‘गो-अहेड’ क्षेत्र के रूप में खोल दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने गहरे समुद्र में नए ऊर्जा भंडार तलाशने की दिशा में सरकार की पहल का उल्लेख करते हुए 85 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी दी।
परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा का अहम आधार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य तय किया है। उन्होंने 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर क्षमता हासिल करने की बात कही। साथ ही इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में भारत की उपलब्धि को परमाणु ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ा है। उनके मुताबिक खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन पांच गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सात गुना बढ़ी है। उन्होंने मोबाइल फोन उत्पादन और डिजिटल ट्रांजैक्शन में भी वृद्धि का दावा किया।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से बड़े लक्ष्य तय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बड़े सपने सोच का दायरा बढ़ाते हैं और दृढ़ इच्छाशक्ति कठिन परिस्थितियों से निकलने का रास्ता तैयार करती है।
उन्होंने दोहराया कि 2047 तक विकसित भारत बनना केवल एक सरकारी लक्ष्य नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों की सामूहिक जिम्मेदारी और संकल्प है।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति भी संवेदना जताई और भरोसा दिलाया कि संकट की घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के इस अवसर पर पहली बार 15 अगस्त को लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दे रही है।