नीट पेपर लीक मामला: मोदी सरकार का बड़ा कदम, एनटीए के 47 ऑफिसर बर्खास्त

नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक का सबसे बड़ा कदम उठाया गया है। दरअसल केंद्र की मोदी सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अधिकारियों को एक ही बार में बर्खास्त कर दिया है। इनमें अधिकारी और कर्मचारी शामिल है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 24, 2026, 11:10:00 PM

नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक का सबसे बड़ा कदम उठाया गया है। दरअसल केंद्र की मोदी सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अधिकारियों को एक ही बार में बर्खास्त कर दिया है। इनमें अधिकारी और कर्मचारी शामिल है।

मिली खबर के अनुसार नीट पेपर लीक मामले में एनडीए एक्शन में है अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलाकर के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है एक न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से कुछ अधिकारियों के ऊपर कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 24 घंटे पहले ही दिए गए संदेश के बाद इस बड़े कदम को उठाया गया है। 

मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार अब एनडीए में व्यापक स्तर पर बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। ऐसी सूचना है कि अगले महीने एजेंसी का पुनर्गठन किया जा सकता है और इसके आउटसोर्सिंग के तौर तरीकों में बदलाव किया जा सकता है। यह पूरी प्रक्रिया एक हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश के आधार पर की जा रही है ताकि आगे एक लीक प्रूफ परीक्षा प्रणाली तैयार की जा सके।

बता दे की नीट पेपर लीक मामले को लेकर के छात्र उबाल पर हैं। राजधानी के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों में छात्रों के द्वारा प्रदर्शन किया जा रहे हैं। इससे पहले गुरुवार को ही केंद्र सरकार ने बाद फिर बदला करते हुए 17 आईएएस अधिकारियों का भी तबादला किया था। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के मौजूदा सचिव को उनका पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह पर 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था।

बीती देर रात पीएम मोदी की तरफ से जारी किए गए वीडियो संदेश के बाद शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक से जुड़े बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस बिल में पेपर लीक के आरोपियों के ऊपर अधिकतम 10 करोड रुपए का जुर्माना शामिल है। इसके अलावा दूसरी दोषी जाने वाले को कम से कम पांच और ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक की सजा देने का प्रावधान है। इन दोनों ही स्थितियों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।