हिंदी और मराठी सिनेमा के बेहद संजीदा, सशक्त और अपनी अलग अदायगी के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर ने गोवा में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था और डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। नाना के निधन की खबर सामने आते ही उनके चाहने वालों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। करीब पांच दशक लंबे करियर में नाना ने अपने दमदार अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में खास पहचान बनाई। उनकी बेबाक संवाद अदायगी और यादगार किरदार हमेशा दर्शकों के दिलों में जिंदा रहेंगे। इस बीच हम आपको नाना पाटेकर के उन 10 दमदार डायलॉग्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो सिनेमा जगत के इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए अमर रहेंगे।
नाना पाटकेर साल 1978 में आई फिल्म गमन से अपने एक्टिंग करियर का आगाज किया था। इसके बाद वह क्रांतिवीर, यशवंत और तिरंगा जैसी कई बेहतरीन फिल्मों का हिस्सा रहे और उनकी मूवीज के डायलॉग्स भी काफी ज्यादा पॉपुलर रहे थे। उनकी आवाज का उतार-चढ़ाव, संवाद बोलने का अंदाज, चेहरे की कठोरता और आंखों में उतर जाने वाला भाव दर्शकों को सीधे कहानी के भीतर ले जाता था। नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐसे अध्याय का बंद होना है, जिसमें अभिनय केवल चेहरे और संवाद का खेल नहीं था। वह आंखों से बोलते थे, खामोशी से कहानी कहते थे और संवादों में ऐसा असर छोड़ जाते थे जिसे दर्शक थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी अपने साथ लेकर चलता था।
नाना पाटेकर के दमदार डायलॉग्स
आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने...क्रांतिवीर
ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून…बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा... क्रांतिवीर
एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है... यशवंत
सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान... यशवंत
ऊपर वाला भी ऊपर से देखता होगा तो उसे शर्म आती होगी... मैंने सबसे खूबसूरत चीज बनाई थी, इंसान... नीचे देखा तो सब कीड़े बन गए: 'क्रांतिवीर'
हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं...क्रांतिवीर
धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं... परिंदा
हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है... अब तक छप्पन
एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है... प्रहार
साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे... वेलकम
भगवान का दिया हुआ सब कुछ है, दौलत है, शोहरत है, इज्जत है’- वेलकम
अगर नाना पाटेकर के सबसे यादगार संवादों की बात हो तो ‘क्रांतिवीर’ का नाम सबसे पहले आता है। 1994 में आई इस फिल्म में उन्होंने प्रताप नारायण तिलक का किरदार निभाया था। उनका एक बेहद चर्चित संवाद था, “ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून...” इस सीन में उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि इंसान के खून को धर्म के आधार पर अलग नहीं किया जा सकता। फिल्म में उनका एक और बेहद यादगार सीन था, जिसकी शुरुआत “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने...” से होती है। यह सीन आज भी उनके करियर के सबसे चर्चित दृश्यों में गिना जाता है।
बता दें कि ‘क्रांतिवीर’ से लेकर ‘तिरंगा’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों के जरिए बॉलीवुड में अलग पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया।वह हमेशा किसानों की आवाज उठाते रहते थे. नाना पाटेकर खुद भी बड़े किसान थे और 27 एकड़ के फार्म हाउस में खेती करते थे. यहां वह अलग-अलग फसलें उगाते थे. नाना पाटेकर की आखिरी इच्छा के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार पुणे स्थित उनके फार्म हाउस में किया जाएगा. उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी. अंतिम संस्कार पुणे में ही होने की संभावना है. सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने अभिनेता नाना पाटेकर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया है. यह फैसला मराठी थिएटर के साथ-साथ मराठी और हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए लिया गया है.