भोजपुर : कभी जलकुंभी से पूरी तरह ढका भोजपुर के बिहिया प्रखंड के चकवथ गांव का 52 बीघा का विशाल पोखर अब साफ और सुंदर नजर आ रहा है। एक समय पोखर में इतनी ज्यादा जलकुंभी थी कि पानी तक दिखाई नहीं देता था और इसका उपयोग भी काफी कम हो गया था। अब प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से पोखर की तस्वीर बदल रही है। स्थानीय निवासी रोहित कुमार बताते हैं, 52 बीघा पोखर जलकुंभी से ढका हुआ था। लोग आसपास भी आना नहीं चाहते थे। अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। बगल में मंदिर और पोखर के पास सीढ़ी, यह पोखर हमारे गांव की पहचान बन चुकी है।
पोखर की सफाई के लिए सभी संबंधित विभागों के सहयोग से विशेष अभियान चलाया गया
पोखर की सफाई के लिए सभी संबंधित विभागों के सहयोग से विशेष अभियान चलाया गया। डीडीसी और डीएम के पहल पर सभी विभागों की कन्वर्जेंस बैठक हुई, जिसके बाद सफाई का अभियान शुरू किया गया। इस अभियान में स्वच्छता कर्मियों, एनडीआरएफ की टीम, स्थानीय पंचायत जनप्रतिनिधियों और गांव के लोगों ने मिलकर काम किया। जिला समन्वयक भोजपुर रंजय बैठा बताते हैं, इस पोखर में जलकुंभी बहुत ज्यादा थी। पानी नजर नहीं आ रहा था। सभी विभागों के सहयोग और डीडीसी और डीएम की पहल पर अभियान चलाया गया। अभी आप देख रहे हैं, बहुत बढ़िया हो गया है। पानी का सीओडी-बीओडी हमेशा कम रहे, इसके लिए हम लोग छोटे-छोटे नवाचार भी कर रहे हैं।
पोखर को साफ करने के साथ-साथ इसे फिर से स्वच्छ और उपयोगी बनाने पर भी काम किया जा रहा है
पोखर को साफ करने के साथ-साथ इसे फिर से स्वच्छ और उपयोगी बनाने पर भी काम किया जा रहा है। इसके लिए फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड्स तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। पानी के प्रदूषण को कम करने और इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। छोटे-छोटे केना एंडिके के पौधे लगाए जा रहे हैं, ताकि पानी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे। फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड कृत्रिम रूप से तैरते हुए प्लेटफॉर्म होते हैं, जिनका उपयोग झीलों, तालाबों और दूषित जल निकायों को प्राकृतिक तरीके से साफ करने के लिए किया जाता है। वहीं केना इंडिका जिसे आमतौर पर 'केला' या 'कर्दमानी' भी कहा जाता है, पानी को साफ करने और उसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए एक प्राकृतिक फिल्टर का काम करता है।
पोखर के सौंदर्यीकरण पर भी काम किया जा रहा है
पोखर के सौंदर्यीकरण पर भी काम किया जा रहा है। मंदिर के सामने स्थित यह पोखर अब जलकुंभी से मुक्त होकर अपने स्वच्छ और उपयोगी स्वरूप की ओर बढ़ रहा है। आसपास के क्षेत्र को भी साफ रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बिहिया की प्रखंड विकास पदाधिकारी मोनालिसा प्रियदर्शनी बताती हैं, भोजपुर जिले के डीडीसी की पहल पर इस पोखर का जीर्णोद्धार किया गया है। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों का काफी योगदान रहा है। तालाब के आसपास जितने भी घर बसे हुए हैं, स्वच्छता अभियान के तहत घर से कचरा उठाव भी हो रहा है।
प्रशासन व स्थानीय लोगों के इस साझा प्रयास से 52 बीघा का यह पोखर अब पहले की तुलना में काफी स्वच्छ, सुंदर व सुरक्षित नजर आ रहा है
प्रशासन और स्थानीय लोगों के इस साझा प्रयास से 52 बीघा का यह पोखर अब पहले की तुलना में काफी स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित नजर आ रहा है। यह पोखर गांव के लिए सिर्फ एक जल स्रोत नहीं है, बल्कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी का एक बेहतर उदाहरण भी बन सकता है। जल स्त्रोतों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसे स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों की भागीदारी और प्रशासन के प्रयास से चकवथ का यह पोखर इसी सोच को मजबूत कर रहा है।