बिहार की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए उसे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का असर राजगीर में भी दिखाई दे रहा है। अपनी हरी-भरी पहाड़ियों, वन क्षेत्र, गर्म जलस्रोत, घोड़ा कटोरा और नेचर सफारी से राजगीर इको टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रकृति संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं के बीच संतुलन कायम करते हुए यहां विकसित किए जा रहे पर्यटन स्थलों ने राजगीर को प्रकृति प्रेमियों और रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों की पसंद बना दिया है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर तक 24,55,255 पर्यटकों ने राजगीर का भ्रमण किया, जिनमें 23,37,383 घरेलू और 1,17,872 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। वहीं जनवरी से मार्च 2026 तक 1,37,855 पर्यटक राजगीर पहुंचे। राजगीर नेचर सफारी इको टूरिज्म का प्रमुख आकर्षण बनकर सामने आई है। पहाड़ियों और प्राकृतिक वन क्षेत्र के बीच विकसित इस परिसर में ग्लास स्काईवॉक, सस्पेंशन ब्रिज, जिपलाइन, स्काई साइकिल, नेचर ट्रेल सहित कई रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। विभाग का उद्देश्य पर्यटन को केवल मनोरंजन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि पर्यटकों को वन, जैव-विविधता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना भी है।
वैभवगिरि, विपुलाचल, रत्नागिरि, उदयगिरि और स्वर्णगिरि जैसी पहाड़ियों से घिरा राजगीर प्राकृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन का अनूठा संगम है। पहाड़ियों के बीच फैली हरियाली, शांत वातावरण और मनोरम दृश्य यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के करीब होने का एहसास कराते हैं।
राजगीर के गर्म जलस्रोत धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण केंद्र हैं। वहीं पहाड़ियों से घिरा घोड़ा कटोरा अपनी हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन गतिविधियों के जरिए इस क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती को बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
राजगीर का रोपवे पर्यटकों को पहाड़ियों और आसपास के प्राकृतिक परिदृश्य का आसमान से दीदार कराता है। रोपवे की यात्रा राजगीर के पर्यटन अनुभव को रोमांच से जोड़ती है और पर्यटकों को प्रकृति का एक अलग ही रूप देखने का अवसर देती है। वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रयासों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय को पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर है। स्थानीय गाइड, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं।