सावधान! कजिन मैरिज से बड़ा खतरा, खाड़ी देशों के डॉक्टरों ने किया आगाह

भारत में भी इन दिनों कजिन मैरिज (चाचा, मौसी, ताऊ और बुआ के बच्चों के साथ शादी) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के डॉक्टरों ने खाड़ी देशों में कजिन मैरिज के बढ़ते चलन को लेकर अलर्ट किया। है।

भारत में भी इन दिनों कजिन मैरिज (चाचा, मौसी, ताऊ और बुआ के बच्चों के साथ शादी) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के डॉक्टरों ने खाड़ी देशों में कजिन मैरिज के बढ़ते चलन को लेकर अलर्ट किया है। इससे होने वाले हेल्थ रिस्क को लेकर आगाह किया गया है। डॉक्टरों का मानना है कि कजिन मैरिज से नई पीढ़ी में जेनेटिक बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। 

डॉक्टरों का कहना है कि एक ही परिवार या करीबी रिश्तेदारी में शादी करने से जेनेटिक यानी आनुवंशिक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।  यही वजह है कि संयुक्त अरब अमीरात में जनवरी 2025 से शादी से पहले जीन टेस्टिंग अनिवार्य कर दी गई है ताकि चचेरे, ममेरे, मौसेरे या फुफेरे भाई-बहन के बीच शादी के बाद बच्चों में होने वाले हेल्थ रिस्क से बचा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही परिवार या करीबी रिश्तेदारी में शादी करने से जेनेटिक यानी आनुवंशिक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।  

जेनेटिक यानी आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के लिए डॉक्टरों ने जीनोम लिटरेसी पर खास जोर दिया है ताकि लोग शादी से पहले जेनेटिक टेस्टिंग और काउंसलिंग के महत्व को समझ सकें और भविष्य में होने वाले बच्चों को जन्मजात बीमारियों से बचा सकें। कजिन मैरिज से होने वाले बच्चों में खतरनाक बीमारियां फैलने से रोकने के लिए यूएई में शादी से पहले जीन टेस्टिंग कंपल्सरी कर दी गई। 

डॉक्टरों के मुताबिक करीबी रिश्तेदारों में DNA काफी हद तक एक जैसा होता है।  अगर दोनों कजिन्स में किसी एक ही पूर्वज से मिला कोई छिपा हुआ (रिसेसिव) जीन म्यूटेशन हो,  तो उनके बच्चे में उस खराब जीन की दो कॉपी आने का खतरा ज्यादा होता है जिससे उसमें बीमारी की संभावना बहुत ही ज्यादा हो सकती है।  

बता दें कि कजिन मैरिज में होने वाली संतान में खून से जुड़ी बीमारियां जैसे थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया का खतरा बहुत ज्यादा होता है।   सिस्टिक फाइब्रोसिस, जन्म से दिल की खराबी और किडनी की समस्याएं जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।  इतना ही नहीं बौद्धिक क्षमता में कमी, जन्म से सुनने में दिक्कत और देखने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।