झारखंड विधानसभा में पहली बार SLBC रिपोर्ट, अब विधायकों की नजर बैंकिंग सिस्टम पर

झारखंड विधानसभा में पहली बार SLBC रिपोर्ट, अब विधायकों की नजर बैंकिंग सिस्टम पर

झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। वित्त मंत्री ने सदन में स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी (SLBC) की रिपोर्ट प्रस्तुत की। सरकार के अनुसार, देश में पहली बार किसी राज्य की विधानसभा के भीतर इस तरह की रिपोर्ट रखी गई है।

सरकार का मानना है कि SLBC रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर लाने से बैंकिंग क्षेत्र की गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। अब विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता, कर्ज वितरण और सरकार की वित्तीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर अधिक प्रभावी ढंग से नजर रख सकेंगे।

रिपोर्ट में राज्य के क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो में सुधार का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2024 में 50.2 प्रतिशत रहा CD रेशियो वर्ष 2026 में बढ़कर 54.97 प्रतिशत, यानी लगभग 55 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार इसे राज्य में ऋण प्रवाह की स्थिति बेहतर होने के संकेत के तौर पर देख रही है।

राज्य की वार्षिक ऋण योजना के लिए 1.73 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रिपोर्ट में बैंकों में 44,979 करोड़ रुपये की जमा और 22,613 करोड़ रुपये के ऋण अग्रिम का उल्लेख किया गया है। हालांकि, दिए गए इन दोनों आंकड़ों से गणना करने पर CD रेशियो 54.97 प्रतिशत से मेल नहीं खाता; इसलिए आधिकारिक रिपोर्ट के आंकड़ों का संदर्भ लेते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

सरकार की विभिन्न ऋण योजनाओं की प्रगति भी रिपोर्ट में सामने आई है। गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से अब तक 330 लाभुकों को करीब 27 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 13.58 लाख किसानों को लाभ मिला है और उनके लिए 9,240 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

स्वयं सहायता समूहों के क्षेत्र में 61 हजार लाभुकों को लगभग 7,700 करोड़ रुपये का ऋण मुहैया कराया गया है। दूसरी ओर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर के लिए 52,885 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है।

SLBC के आंकड़ों के अनुसार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 8,845 करोड़ रुपये और गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 93,862 करोड़ रुपये के ऋण अग्रिम किए गए हैं।

वित्त मंत्री के मुताबिक, विधानसभा में SLBC रिपोर्ट आने से अब जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों की बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी ऋण योजनाओं की प्रगति की सीधे समीक्षा करने का अवसर मिलेगा। सरकार का दावा है कि इससे वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलेगी और विकास योजनाओं के लिए ऋण की उपलब्धता तथा उनके क्रियान्वयन की निगरानी और प्रभावी हो सकेगी।