रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में कैंसर मरीजों के लिए अत्याधुनिक PET स्कैन सेवा शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लंबे समय से जारी निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब संस्थान प्रशासन मशीन स्थापित करने और सेवा शुरू करने की तैयारी में जुट गया है। यह सुविधा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत संचालित की जाएगी, जिससे झारखंड के हजारों मरीजों को राज्य के भीतर ही उन्नत जांच उपलब्ध हो सकेगी।
रिम्स प्रशासन के अनुसार, अभी तक झारखंड में किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में PET स्कैन की व्यवस्था नहीं है। कैंसर से जूझ रहे मरीजों को जांच के लिए कोलकाता, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। कई मामलों में निजी अस्पतालों में होने वाला भारी खर्च मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है। नई सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को समय और पैसे दोनों की बचत होने की उम्मीद है।
संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना और बीपीएल श्रेणी से जुड़े मरीजों को PET स्कैन निशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। निजी संस्थानों में जहां इस जांच के लिए 25 हजार से 45 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, वहीं रिम्स में सामान्य मरीजों के लिए भी कम दर तय करने पर विचार किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक यह जांच लगभग पांच हजार रुपये में उपलब्ध हो सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, PET स्कैन कैंसर की पहचान और उसके शरीर में फैलाव का पता लगाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है। इसके जरिए यह समझने में मदद मिलती है कि उपचार का मरीज पर कितना असर हो रहा है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इलाज की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इस तकनीक का उपयोग केवल कैंसर तक सीमित नहीं है, बल्कि हृदय और मस्तिष्क से जुड़ी कुछ जटिल बीमारियों की जांच में भी किया जाता है।
रिम्स में पहले से MRI, CT स्कैन और एक्स-रे जैसी रेडियोलॉजी सेवाएं PPP मॉडल पर संचालित हो रही हैं। इन सेवाओं को निजी अस्पतालों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि भुगतान में देरी की समस्या के कारण आयुष्मान और बीपीएल मरीजों के लिए मुफ्त जांच सेवाओं पर असर पड़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। सेवा संचालित करने वाली एजेंसियों का कहना है कि संस्थान की ओर से बड़ी राशि का भुगतान लंबित रहने से संचालन प्रभावित होता है।
इसी तरह की स्थिति रांची सदर अस्पताल में भी देखने को मिली है, जहां PPP मोड में MRI और CT स्कैन सेवाएं उपलब्ध हैं। भुगतान में अनियमितता के कारण कई बार गरीब मरीजों की निशुल्क जांच बाधित हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि रिम्स में PET स्कैन सेवा को सफल बनाने के लिए केवल मशीन लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वित्तीय प्रबंधन और संचालन प्रणाली को भी मजबूत बनाना जरूरी होगा।
आईएमए सचिव डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि सरकार को ऐसी स्वास्थ्य सेवाओं के दीर्घकालिक संचालन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार यदि भुगतान व्यवस्था पारदर्शी और समयबद्ध नहीं रही, तो गरीब मरीजों तक योजनाओं का लाभ नियमित रूप से पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रोहित झा के मुताबिक झारखंड में हर वर्ष 35 से 40 हजार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। तंबाकू सेवन, बढ़ता प्रदूषण, अस्वस्थ जीवनशैली और देर से जांच जैसी वजहें इसके प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। राज्य में मुंह, फेफड़े, स्तन और गर्भाशय कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और स्क्रीनिंग से कैंसर को शुरुआती अवस्था में नियंत्रित करना संभव है।
फिलहाल रिम्स में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडियोथेरेपी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं, जहां हर महीने हजारों मरीज इलाज और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। वहीं रांची सदर अस्पताल में स्तन, सर्वाइकल और ओरल कैंसर की प्रारंभिक जांच और स्क्रीनिंग की सुविधा संचालित की जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को उम्मीद है कि PET स्कैन सेवा शुरू होने से झारखंड में कैंसर उपचार व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।