झारखंड में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस मुख्यालय स्तर पर प्रस्तावित दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है। 29 और 30 मई को आयोजित होने वाली इस समीक्षा बैठक में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल होना था। बैठक की अध्यक्षता डीजीपी द्वारा की जानी थी, जहां विभिन्न जिलों की सुरक्षा स्थिति, लंबित मामलों और पुलिसिंग व्यवस्था पर व्यापक चर्चा प्रस्तावित थी।
इसी बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक ज्ञान प्रताप सिंह शुक्रवार को चाईबासा पहुंचेंगे। उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा करना है। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ऑपरेशन निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। दौरे के दौरान CRPF और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी रणनीति, अभियान की प्रगति और सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रस्तावित समीक्षा बैठक में राज्यभर में दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों का जिलावार आकलन किया जाना था। इसमें डकैती, लूट, चोरी, रंगदारी, अपहरण, अवैध हथियारों से जुड़े अपराध तथा नक्सली हिंसा और गैंगवार में हुई हत्याओं के मामलों की स्थिति पर चर्चा शामिल थी। विशेष रूप से वर्ष 2022 से मार्च 2026 तक दर्ज मामलों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी थी।
बैठक के एजेंडे में लंबे समय से लंबित मामलों की समीक्षा भी प्रमुख थी। एक वर्ष से लेकर एक दशक तक लंबित पड़े मुकदमों की जांच प्रक्रिया, देरी के कारण और प्रशासनिक अड़चनों पर अधिकारियों से जवाब मांगा जाना था।
महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराधों को लेकर भी विस्तृत समीक्षा प्रस्तावित थी। पॉक्सो एक्ट, दहेज हत्या, दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, डायन प्रताड़ना और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की प्रगति का आकलन किया जाना था। साथ ही पीड़ितों को मुआवजा वितरण और लंबित अनुसंधान की स्थिति पर भी चर्चा तय थी।
राज्य में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और मानव तस्करी के मामलों को भी बैठक में प्राथमिकता दी जानी थी। विशेषकर ऐसे मामलों की समीक्षा प्रस्तावित थी जिनमें बच्चे या अन्य पीड़ित अब तक लापता हैं। इसके अलावा जेलों में जनवरी से मार्च 2026 के बीच चलाए गए सर्च ऑपरेशन, बरामद मोबाइल फोन और नशीले पदार्थों की रिपोर्ट भी पेश की जानी थी।
अधिकारियों को अपराधियों के खिलाफ सीसीए, एनएसए, तड़ीपार और थाना हाजिरी जैसी कार्रवाई की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी देनी थी। इसके साथ-साथ गंभीर मामलों में स्पीड ट्रायल की प्रगति और दोषसिद्धि दर बढ़ाने के उपायों पर चर्चा का कार्यक्रम था।
पुलिस अधोसंरचना और निगरानी व्यवस्था भी समीक्षा के दायरे में थी। थानों और संवेदनशील इलाकों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता, नए थाना भवनों और पुलिस पिकेट के निर्माण प्रस्तावों तथा मरम्मत कार्यों की स्थिति की जांच प्रस्तावित थी। इसके अलावा पिछले एक वर्ष के दौरान जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा किए गए थानों और पुलिस पिकेट के भौतिक निरीक्षण का ब्योरा भी मांगा जाना था।
बैठक में पुलिसकर्मियों के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई, लंबित जांच और अनुशासनात्मक फैसलों की समीक्षा भी शामिल थी। वहीं विभिन्न जिलों द्वारा अतिरिक्त पुलिस बल, बजट, वाहन, सुरक्षा उपकरण और नक्सलियों तथा अपराधियों पर इनाम घोषित करने से संबंधित भेजे गए प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया जाना था।