झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा 18 जून को मतदान की तारीख घोषित किए जाने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त की राजनीति करने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को कांग्रेस की आंतरिक असुरक्षा करार दिया है।
कांग्रेस की ओर से प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद अब भाजपा राज्यसभा चुनाव में दूसरे रास्ते अपनाने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि विपक्ष धनबल और राजनीतिक दबाव के जरिए समीकरण बदलने की रणनीति बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन के विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और भाजपा की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
राकेश सिन्हा ने यह भी कहा कि इससे पहले भी भाजपा ने ऐसी राजनीतिक रणनीति अपनाने का प्रयास किया था, लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। कांग्रेस का कहना है कि गठबंधन के भीतर किसी तरह की टूट की संभावना नहीं है।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को अब अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी को अपने विधायकों की निष्ठा पर विश्वास होता, तो इस तरह के आरोप लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
अजय साह ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यसभा भेजे गए कुछ नेताओं को लेकर पहले भी विवाद सामने आए हैं। उनके मुताबिक कांग्रेस को विपक्ष पर आरोप लगाने के बजाय अपने संगठन और विधायकों की एकजुटता पर ध्यान देना चाहिए।
राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास फिलहाल 24 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 21 विधायक शामिल हैं, जबकि जदयू, आजसू और लोजपा (रामविलास) के एक-एक विधायक गठबंधन के साथ हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में भाजपा को जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर दोनों खेमों की निगाहें अपने-अपने विधायकों पर टिकी हुई हैं। मतदान की तारीख नजदीक आते ही राज्य की राजनीति में गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।