झारखंड के होमगार्ड जवानों ने अपने भत्तों में संशोधन की मांग को लेकर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पुलिसकर्मियों की तर्ज पर महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी करने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि पुलिस बल को मिलने वाले भत्तों में वृद्धि होने के बावजूद गृह रक्षकों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी द्वारा भेजे गए ज्ञापन में न्यायालयों के पूर्व आदेशों का उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि झारखंड हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में गृह रक्षकों को पुलिस कर्मियों के समान न्यूनतम वेतन और संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया है। इसी क्रम में राज्य सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अगस्त 2024 में मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद गृह रक्षकों के लिए प्रतिदिन 1088 रुपये पारिश्रमिक निर्धारित किया था।
संगठन का तर्क है कि जब यह संशोधित पारिश्रमिक लागू किया गया था, तब पुलिसकर्मियों को 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा था। इसके बाद सरकारी कर्मचारियों और पुलिस बल के डीए में वृद्धि होकर 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि, गृह रक्षकों के मामले में इसी अनुपात में कोई संशोधन नहीं किया गया, जिससे दोनों के बीच अंतर बढ़ गया है।
होमगार्ड प्रतिनिधियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में भत्तों में अपेक्षित संशोधन नहीं होने से हजारों जवानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उनका मानना है कि न्यायालयों के निर्देशों और समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सरकार को गृह रक्षकों के महंगाई भत्ते की समीक्षा करनी चाहिए।
एसोसिएशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि पुलिस कर्मियों को मिलने वाले लाभों के अनुरूप गृह रक्षकों के वेतन और भत्तों में आवश्यक संशोधन करते हुए महंगाई भत्ते में शीघ्र वृद्धि की जाए, ताकि उन्हें भी समान वित्तीय राहत मिल सके।