लापता नाबालिग केस में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, CBI को मिल सकती है जांच की कमान

लापता नाबालिग केस में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, CBI को मिल सकती है जांच की कमान

बोकारो से नाबालिग लड़की के लापता होने से जुड़े मामले में शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले के दौरान अदालत ने जांच में डिजिटल साक्ष्यों के इस्तेमाल, सोशल मीडिया गतिविधियों और उपलब्ध डेटा की सीमा को लेकर गंभीरता से चर्चा की।

सुनवाई में सामने आया कि लड़की के लापता होने के बाद भी उसके सोशल मीडिया अकाउंट की गतिविधियां दर्ज की गई थीं। ऐसे में जांच के लिए संबंधित अकाउंट से जुड़े आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल करने का मुद्दा अदालत के समक्ष रखा गया। मेटा और गूगल जैसी तकनीकी कंपनियों से आवश्यक डेटा हासिल करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अभी तक उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर करीब दो वर्ष की अवधि का डेटा ही हासिल किया जा सका है। इससे पुराने डिजिटल रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए संबंधित कंपनियों को मामले में औपचारिक रूप से पक्षकार बनाना आवश्यक होगा।

इस प्रक्रिया पर अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि कंपनियों को पक्षकार बनाने से मामले की न्यायिक कार्यवाही और लंबी हो सकती है। इसी संदर्भ में पीठ ने टिप्पणी की कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपना अधिक प्रभावी विकल्प हो सकता है। अदालत के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल कंपनियों से डेटा हासिल करने के लिए अपेक्षित तकनीकी संसाधन और तंत्र मौजूद हैं।

अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में सीबीआई डिजिटल साक्ष्यों की बेहतर तरीके से पड़ताल कर सकती है। हालांकि, राज्य के महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार और उसकी जांच एजेंसियों ने अपने स्तर पर मामले की तह तक पहुंचने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं।

मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 11 अगस्त को होगी। सुनवाई न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव ने पक्ष रखा।

नाबालिग की मां की ओर से बेटी को बरामद करने की मांग को लेकर हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की गई है। अब अगली सुनवाई में अदालत जांच की दिशा और सीबीआई को मामला सौंपने की संभावना पर आगे विचार कर सकती है।