रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में यूजी और पीजी नामांकन प्रक्रिया को लेकर आदिवासी छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष कई अहम मांगें रखी हैं। सोमवार को संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति प्रो. (डॉ.) राजीव मनोहर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष, मेरिट आधारित और समयबद्ध तरीके से कराई जाए। साथ ही रोजगारपरक और जनजातीय-क्षेत्रीय भाषा के पाठ्यक्रमों की सीटों में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाए। संघ ने ज्ञापन में कहा कि विश्वविद्यालय की नामांकन प्रक्रिया में किसी भी निजी एजेंसी या थर्ड पार्टी की भागीदारी नहीं होनी चाहिए। दस्तावेजों के सत्यापन और नामांकन का पूरा कार्य केवल विश्वविद्यालय के स्थायी शिक्षकों और अधिकृत अधिकारियों द्वारा कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास बना रहे और किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका समाप्त हो। आदिवासी छात्र संघ ने चिंता जताई कि बीबीए, एमबीए, कंप्यूटर साइंस, वाणिज्य, कुड़ुख (उरांव), संथाली, मुंडारी, हो और खड़िया जैसे रोजगारपरक एवं जनजातीय-क्षेत्रीय भाषा पाठ्यक्रमों की सीटों में कटौती किए जाने की चर्चा है। संघ का कहना है कि इन पाठ्यक्रमों में हर साल बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आवेदन करते हैं। यदि सीटें कम की गईं तो इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण, आदिवासी, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। इससे कई योग्य छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। संघ ने कहा कि वर्तमान समय में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इन पाठ्यक्रमों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सीटों में कटौती करना छात्रहित के खिलाफ होगा। विशेष रूप से झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है, इसलिए इन विभागों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और उनकी सीटें यथावत रखी जानी चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी मांग की कि सभी मेरिट सूची, कट-ऑफ, रिक्त सीटों का विवरण और स्पॉट एडमिशन से जुड़ी सभी जानकारियां समय-समय पर विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट और संबंधित विभागों के माध्यम से सार्वजनिक की जाएं। साथ ही सभी विभागों के नोटिस बोर्ड पर सीट मैट्रिक्स और मेरिट सूची भी प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा नामांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात और मनमानी रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने तथा छात्रों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की भी मांग की गई। ज्ञापन सौंपने के बाद कुलपति प्रो. (डॉ.) राजीव मनोहर ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि छात्रहित सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि सभी मांगों का नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय पारदर्शी, निष्पक्ष और मेरिट आधारित नामांकन प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिए जाएंगे। इस अवसर पर रोहित उरांव, अक्षय महतो, सचीत कुमार, सलीम गोप और रिसप साहू सहित आदिवासी छात्र संघ के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे।