CM हेमंत ने की पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा

CM हेमंत ने की पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 09, 2026, 5:16:00 PM

झारखंड में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं की प्रगति को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। झारखंड मंत्रालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी ग्रामीण और शहरी परिवारों तक सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने और प्रत्येक घर तक पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी लाने को कहा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पेयजल आपूर्ति तंत्र के रखरखाव, मरम्मत और निगरानी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिन क्षेत्रों में जल संकट की आशंका है या जहां लोगों को पेयजल संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, वहां तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उनके अनुसार, पेयजल व्यवस्था से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जल प्रबंधन में जल सहियाओं की भूमिका को और सशक्त बनाने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिया कि जल सहियाओं को समूहवार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्लंबिंग और तकनीकी कार्यों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही खराब चापाकलों की मरम्मत, सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव में उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। उत्कृष्ट कार्य करने वाली जल सहियाओं को सम्मानित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू करने का भी सुझाव दिया गया।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर जोर

निर्माणाधीन जलापूर्ति परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग का निर्देश दिया। उन्होंने बड़ी योजनाओं से जुड़े ठेकेदारों के लिए डिजिटल समूह बनाकर प्रतिदिन कार्य प्रगति की जानकारी साझा करने और उसकी नियमित समीक्षा करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बेहतर कार्य ढांचा तैयार करने, वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने और योजनाओं के पूरा होते ही उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज करने का भी निर्देश दिया।

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के सभी ग्रामीण परिवारों को पाइपलाइन आधारित पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इस दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

भूजल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने जल संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के लिए अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक रणनीतियां तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही आम लोगों को जल बचाने के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने पर बल दिया।

उन्होंने विशेष रूप से उन चापाकलों के बोरिंग का उपयोग रिचार्ज पिट के रूप में करने का सुझाव दिया जो भूजल स्तर घटने के कारण अनुपयोगी हो चुके हैं। उनका मानना है कि इससे वर्षा जल को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को सुधारने में मदद मिलेगी। इसके अलावा घरों और गांवों में सोक पिट निर्माण को बढ़ावा देने तथा अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपयोग पर भी जोर दिया गया।

हर आंगनबाड़ी तक पहुंचे स्वच्छ पानी

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जल गुणवत्ता को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि नागरिकों को केवल पानी उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस संबंध में पाइपलाइन जलापूर्ति के साथ अन्य प्रभावी उपायों को भी लागू करने का निर्देश दिया गया।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्लास्टिक प्रदूषण से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का भी उल्लेख किया। उन्होंने लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और प्लास्टिक मुक्त गांवों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार आधारित पहल शुरू करने का सुझाव दिया।

कई प्रमुख योजनाओं की समीक्षा

समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन, जल गुणवत्ता निगरानी, हर घर जल अभियान, बहु-ग्रामीण एवं एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, नलकूप योजनाएं, स्वच्छ भारत मिशन, व्यक्तिगत शौचालय निर्माण, ओडीएफ प्लस गांव, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन तथा गोबरधन योजना सहित कई कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जन शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जवाबदेह व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव अबू इमरान, अतिरिक्त सचिव शशि रंजन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।