भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और ग्रामीण परिवहन पर फोकस, मुख्यमंत्री ने विभागों को दिए बड़े निर्देश

भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और ग्रामीण परिवहन पर फोकस, मुख्यमंत्री ने विभागों को दिए बड़े निर्देश

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 02, 2026, 11:09:00 AM

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परिवहन विभाग तथा राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के कार्यों का विस्तृत आकलन किया। बैठक में विभागों की प्रगति, लंबित मामलों और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध बनाने के लिए डिजिटल प्रणालियों का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे और परिवहन सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यभर में भूमि रिकॉर्ड के चरणबद्ध डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेज करने को कहा। उनका मानना है कि एकीकृत डिजिटल व्यवस्था विकसित होने के बाद नागरिक किसी भी जमीन की वर्तमान स्थिति, स्वामित्व और उससे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी एक ही मंच पर प्राप्त कर सकेंगे।

उन्होंने निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण, स्वामित्व और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए ताकि भूमि खरीदने वाले लोगों को पहले से यह जानकारी मिल सके कि संबंधित जमीन किसी सरकारी परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है या अधिग्रहण की प्रक्रिया में है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे भूमि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों की संभावना कम होगी।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अधिग्रहित भूमि को संबंधित विभागों और परियोजना एजेंसियों को समय पर हस्तांतरित करने की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली लागू होने से विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान होगा और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

बैठक में खासमहल जमीन से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने लीज नवीनीकरण, लीज हस्तांतरण और भूमि उपयोग परिवर्तन जैसी प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रणाली में मौजूद जटिलताओं को दूर करने के लिए प्रक्रियाओं का मानकीकरण किया जाए तथा उन्हें ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाए।

इसके साथ ही उन्होंने खासमहल क्षेत्र के सभी लीजधारकों का व्यापक सर्वेक्षण और डिजिटल मैपिंग कराने को कहा। लीज संबंधी दस्तावेजों की दोबारा जांच कर रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों, अनियमितताओं या संभावित फर्जीवाड़े की पहचान करने पर भी जोर दिया गया।

पंचायत स्तर तक ड्राइविंग लाइसेंस सुविधा पहुंचाने का निर्देश

परिवहन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित कर ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था विकसित करने को कहा। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए जिलावार मार्ग निर्धारण, रूट मैप तैयार करने और सड़क संपर्क को मजबूत करने पर बल दिया।

रांची स्मार्ट सिटी में विकसित हो रहे ट्रैफिक पार्क की प्रगति का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल बच्चों और युवाओं को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी मनोरंजक तरीके से उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित होगी।

इसके अलावा ‘गुड सेमेरिटन योजना’ और ‘हिट एंड रन मुआवजा योजना’ की समीक्षा करते हुए उन्होंने दुर्घटना प्रभावित लोगों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता दोहराई। अधिकारियों को इन योजनाओं के बारे में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए।

‘गुरुजी आपातकालीन सेवा-1944’ जल्द शुरू करने के निर्देश

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘गुरुजी आपातकालीन सेवा-1944’ को शुरू करने की दिशा में तैयारी चल रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने कार्य में तेजी लाने और सेवा को जल्द लागू करने का निर्देश दिया। उनका कहना था कि यह व्यवस्था आपात स्थितियों में लोगों तक त्वरित सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वाहन परीक्षण और स्क्रैपिंग व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी परिसरों में लंबे समय से खड़े अनुपयोगी वाहनों के निस्तारण के लिए एक प्रभावी मॉडल तैयार करने को कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे बेकार वाहनों के निष्पादन के साथ-साथ राजस्व प्राप्ति की संभावनाएं भी बढ़ें।

बैठक में परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव राजीव रंजन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।