भागलपुर जिले के पीरपैंती क्षेत्र का प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त जर्दालु आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए रवाना हुई पहली खेप केवल कृषि उत्पादों का निर्यात नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, कौशल और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी भी लेकर गई। इस उपलब्धि के पीछे स्थानीय किसानों, महिला सदस्यों, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और अदाणी फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
निर्माणाधीन पीरपैंती पावर प्रोजेक्ट के आसपास के गांवों में अदाणी फाउंडेशन ने कृषि आधारित आजीविका को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया है। 11 अगस्त 2026 को अपने 30 वर्ष पूरे करने जा रहे फाउंडेशन ने एग्रो पॉइंट फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के साथ मिलकर जर्दालु आम की पूरी मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। किसानों को आधुनिक खेती, गुणवत्ता नियंत्रण, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ने के साथ-साथ निर्यात प्रक्रिया की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।
इन प्रयासों का सबसे सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण महिलाओं पर देखने को मिला। पहले जहां उनकी भूमिका केवल बागानों तक सीमित थी, वहीं अब वे आम की तुड़ाई, छंटाई, ग्रेडिंग, गुणवत्ता परीक्षण, सफाई, पैकिंग और निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि परिवार और समाज में उनकी भूमिका भी पहले से अधिक मजबूत हुई है।
छोटी पसाहीचक गांव की एफपीओ सदस्य सुनीता देवी बताती हैं कि पहले किसान स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर रहते थे और अपनी उपज मनचाहे मूल्य पर नहीं बेच पाते थे। एफपीओ से जुड़ने के बाद आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर बाजार तक पहुंच मिलने से आम का उचित मूल्य मिलने लगा। उनके अनुसार, बढ़ी हुई आय से अब वह बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और बचत में योगदान दे रही हैं तथा परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी राय को भी महत्व मिलने लगा है।
जब पीरपैंती का जर्दालु आम दुबई के लुलु मॉल और उसकी रिटेल श्रृंखला तक पहुंचा, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया। एफपीओ से जुड़ी बेबी देवी का कहना है कि अपने हाथों से तैयार और पैक किए गए आमों को विदेश जाते देख उन्हें अपनी मेहनत का वास्तविक सम्मान महसूस हुआ। उनके अनुसार, यह उपलब्धि केवल कृषि उत्पाद के निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और नई पहचान का भी प्रतीक है।
इसी तरह जामर गांव की मुरली देवी ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनके क्षेत्र का जर्दालु आम अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गया है, तो यह पूरे गांव के लिए गौरव का क्षण था। इससे यह विश्वास और मजबूत हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पाद भी वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बना सकते हैं।
अदाणी फाउंडेशन की ओर से महिलाओं और युवतियों को वैज्ञानिक बागवानी, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, स्वच्छता, गुणवत्ता मानकों और आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया। इन पहलों ने स्थानीय कारीगरी और कृषि उत्पादों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पीरपैंती की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि किसानों और ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो स्थानीय उत्पाद वैश्विक पहचान हासिल कर सकते हैं। जर्दालु आम का दुबई पहुंचना केवल बिहार के एक विशेष फल की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और बदलते सामाजिक परिदृश्य का भी प्रतीक बनकर उभरा है।