खत्म हुआ इंतजार! आज एकांतवास से बाहर आएंगे भगवान जगन्नाथ

खत्म हुआ इंतजार! आज एकांतवास से बाहर आएंगे भगवान जगन्नाथ

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 15, 2026, 10:53:00 AM

रांची की ऐतिहासिक रथ यात्रा का शुभारंभ अब बेहद करीब है। लंबे इंतजार के बाद बुधवार को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा एकांतवास से बाहर आकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा से लेकर आषाढ़ अमावस्या तक भगवान एकांतवास में रहते हैं। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर उनके पुनः दर्शन के साथ रथ यात्रा उत्सव की औपचारिक शुरुआत होती है।

बुधवार को मंदिर परिसर में शाम चार बजे से नेत्रदान महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसके लिए श्रद्धालुओं के दोपहर बाद से ही मंदिर पहुंचने की संभावना है। दर्शन से पहले मंदिर परिसर में भजन, संकीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। सुबह की नियमित पूजा के बाद दोपहर तक दर्शन मंडप में राधा-कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं की विशेष आराधना की जाएगी।

इसके बाद भगवान के विग्रहों को दर्शन मंडप में लाकर आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। शाम पांच बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। 108 दीपों की भव्य मंगल आरती, विशेष भोग, विष्णु अष्टकम तथा श्रीमद्भगवद्गीता के द्वादश अध्याय के पाठ के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। श्रद्धालु रात नौ बजे तक भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

गुरुवार को मुख्य रथ यात्रा के दिन मंदिर के द्वार सुबह चार बजे ही खोल दिए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए प्रवेश एवं निकास के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। दोपहर दो बजे तक दर्शन के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को पारंपरिक विधि-विधान के साथ रथ पर विराजमान कराया जाएगा। रथ प्रस्थान से पहले विष्णु लक्षार्चना का आयोजन होगा, जिसमें पुरुष श्रद्धालु धोती और महिलाएं साड़ी पहनकर शामिल होंगी।

शाम करीब पौने पांच बजे रथ में रस्सा बांधा जाएगा और जयघोष के बीच भगवान का रथ मौसीबाड़ी की ओर प्रस्थान करेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम छह बजे तक रथ मौसीबाड़ी पहुंचेगा। वहां महिला श्रद्धालु रथ पर चढ़कर पूजा-अर्चना करेंगी और भगवान के विग्रहों की स्थापना की जाएगी। शाम सात से आठ बजे तक आम श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा, जबकि दिन का समापन मंगल आरती, विष्णु अष्टकम, गीता पाठ और रात साढ़े आठ बजे भगवान के शयन अनुष्ठान के साथ होगा।

इधर रथ मेला भी पूरी तरह सजकर तैयार है। मेले में घरेलू सामान, बरतन, खिलौने, मीना बाजार और विभिन्न प्रकार की दुकानों पर खरीदारी शुरू हो चुकी है। बच्चों के लिए जंपिंग पैड, मिक्की माउस, टावर झूला और मौत का कुआं जैसे मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

मिठाई बाजार में भी अच्छी रौनक देखने को मिल रही है। झालदा सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे व्यापारियों ने लड्डू, बूंदिया, बालूशाही, गाजा और शक्करपाला जैसी पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें सजाई हैं। दुकानदारों का कहना है कि अधिकांश मिठाइयां लगभग 120 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं और रथ यात्रा के दिन बिक्री में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।

मेले में झारखंड की पारंपरिक संस्कृति की झलक भी साफ दिखाई दे रही है। नगाड़ा और मांदर जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ-साथ तलवार, चकला-बेलन, स्टील और लोहे के बरतन तथा मछली पकड़ने के जाल जैसी उपयोगी वस्तुएं भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खानपान और पूजा सामग्री की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। समोसा, गोलगप्पा, चाउमीन और छोले-भटूरे सहित अनेक खाद्य स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं मंदिर से लेकर मौसीबाड़ी तक नारियल, फूल-माला, अगरबत्ती और अन्य पूजन सामग्री की दुकानों पर भी श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है।