पलामू टाइगर रिजर्व में विशेष वन्यजीव सर्वेक्षण, जलस्रोतों पर दिखी हाथी और तेंदुए समेत कई प्रजातियों की मौजूदगी

पलामू टाइगर रिजर्व में विशेष वन्यजीव सर्वेक्षण, जलस्रोतों पर दिखी हाथी और तेंदुए समेत कई प्रजातियों की मौजूदगी

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jun 02, 2026, 10:12:00 AM

पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में वन्यजीव संरक्षण और जैव-विविधता के आकलन को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित विशेष ‘वाटरहोल गणना 2026’ अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। गर्मी के चरम मौसम में जलस्रोतों पर निर्भर वन्यजीवों की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए यह एक दिवसीय व्यापक सर्वेक्षण चलाया गया, जिसमें रिजर्व के विभिन्न प्राकृतिक और मानव निर्मित जलस्रोतों की निगरानी की गई।

अभियान के तहत पीटीआर के कोर और बफर क्षेत्र में बड़ी संख्या में वनकर्मियों, ट्रैकर्स, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों तथा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया था। वन्यजीवों की प्राकृतिक गतिविधियों में किसी प्रकार का व्यवधान न आए, इसके लिए निगरानी कार्य मचान और विशेष छद्मावरण तकनीकों की सहायता से किया गया। इस दौरान फील्ड स्टाफ और प्रकृति प्रेमियों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला।

करीब 14 घंटे तक चले इस अभ्यास में जलस्रोतों पर आने वाले प्रमुख स्तनधारी वन्यजीवों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया गया। प्रत्येक निगरानी दल को निर्धारित प्रपत्र उपलब्ध कराया गया था, जिसमें जानवरों के आगमन का समय, उनकी प्रजाति, नर-मादा एवं शावकों की संख्या के साथ-साथ संबंधित जलस्रोत की स्थिति से जुड़ी जानकारियां दर्ज की गईं।

प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार सर्वेक्षण के दौरान हाथी, तेंदुआ, गौर, चीतल, सांभर, बार्किंग डियर, भालू और सियार जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों की गतिविधियां कई जलस्रोतों पर रिकॉर्ड की गईं। इन अवलोकनों से यह समझने में मदद मिलेगी कि भीषण गर्मी के दौरान वन्यजीव किन जलस्रोतों पर सबसे अधिक निर्भर रहते हैं।

पीटीआर प्रबंधन का कहना है कि इस तरह के सर्वेक्षण केवल वन्यजीवों की मौसमी उपस्थिति का आकलन करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जल प्रबंधन रणनीति तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एकत्रित आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर भविष्य में कृत्रिम जलस्रोतों की व्यवस्था, मौजूदा वाटरहोल्स के रखरखाव और शिकार-रोधी निगरानी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

रिजर्व प्रशासन ने अभियान को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी वनकर्मियों और स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सहयोग से यह चुनौतीपूर्ण कार्य सुरक्षित और निर्धारित समय में पूरा किया जा सका।