पलामू में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की कार्यशैली और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे। समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई विभाग निर्धारित मानकों के अनुरूप न तो अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत कर पा रहे हैं और न ही अद्यतन प्रगति विवरण तैयार करने में सफल हो रहे हैं। इस स्थिति पर पलामू के सांसद विष्णुदयाल राम ने अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
बैठक में जिले की विकास योजनाओं और केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान यह भी चर्चा हुई कि पलामू केंद्र सरकार की आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल है और इसे बेहतर प्रदर्शन के आधार पर संतृप्त (सैचुरेटेड) जिले की श्रेणी तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम के समक्ष जिले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद समिति ने कई बिंदुओं पर सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है।
समीक्षा बैठक में बिजली विभाग से जुड़ा एक मामला भी चर्चा का विषय बना। जानकारी दी गई कि कुछ मामलों में मकान मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जबकि संबंधित संपत्तियों के किरायानामा दस्तावेज उपलब्ध हैं। इस पर सांसद ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि मामले की जांच कर वास्तविक जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
बैठक की अध्यक्षता सांसद विष्णुदयाल राम ने की। इसमें राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता, आलोक चौरसिया और नरेश प्रसाद सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिला उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी, डीएफओ सत्यम कुमार तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। बैठक के दौरान प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।