13 फल, 13 फूल और 13 मिष्ठान... विशेष विधान से हुई मां बिपद्तारिणी की पूजा

13 फल, 13 फूल और 13 मिष्ठान... विशेष विधान से हुई मां बिपद्तारिणी की पूजा

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 18, 2026, 3:33:00 PM

बंगला पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को नाला प्रखंड में मां बिपद्तारिणी पूजा पूरे धार्मिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। बंगाली समुदाय के लिए विशेष महत्व रखने वाले इस व्रत में महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और हर प्रकार के संकट से रक्षा की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखा। सुबह से ही विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

प्रखंड के दलाबड़ स्थित मां रक्षा काली मंदिर, आमलाजोड़ा दुर्गा माता मंदिर, सूड़ियापानी बजरंगबली मंदिर, नीचेपाड़ा शिव-पार्वती मंदिर, नलहटी, गोपालपुर, नतूनडीह और कुमिरदहा समेत कई धार्मिक स्थलों पर एक साथ पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। हजारों महिलाओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ मां बिपद्तारिणी की उपासना कर परिवार की रक्षा और कल्याण की प्रार्थना की।

दलाबड़ गांव के पुरोहित रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने बताया कि इस पूजा में पारंपरिक नियमों का विशेष रूप से पालन किया जाता है। अनुष्ठान के दौरान माता को 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के पुष्प और 13 प्रकार के मिष्ठान अर्पित किए गए। इसके बाद वैदिक रीति से हवन, भोग और आरती संपन्न कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।

दलाबड़ स्थित मां रक्षा काली मंदिर में पूजा का कार्यक्रम सुबह लगभग 11 बजे शुरू हुआ, जो शाम करीब 4 बजे तक चला। इस दौरान बड़ी संख्या में बंगाली समुदाय के श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूजा के समापन पर महिलाओं ने पुरोहित के माध्यम से मां बिपद्तारिणी को समर्पित लाल-पीले रंग का पवित्र धागा धारण किया। परंपरा के अनुसार इस धागे में 13 गांठें लगाई जाती हैं, जिसे संकटों से रक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि मां बिपद्तारिणी का यह व्रत परिवार को विपत्तियों से सुरक्षित रखने, घर में सुख-शांति बनाए रखने और जीवन में मंगल की कामना के लिए किया जाता है। इसी अटूट विश्वास के साथ बंगाली समाज की महिलाएं हर वर्ष इस धार्मिक परंपरा का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करती हैं।

जामताड़ा से संतोष कुमार की रिपोर्ट