हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड स्थित पेटो पंचायत में NTPC चट्टी बरियातु कोल माइंस की 2.2 कोयला परिवहन सड़क को लेकर स्थानीय लोगों का लंबे समय से चला आ रहा असंतोष अब खुले आंदोलन में बदल गया है। विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पंचायत के ग्रामीणों ने परिवहन मार्ग के समीप अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया है। आंदोलन के कारण कोयला परिवहन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और सैकड़ों हाइवा वाहनों का परिचालन रुक गया है।
धरने के पहले ही दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन तथा NTPC प्रबंधन के खिलाफ आवाज बुलंद की। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि क्षेत्र के सांसद और विधायक आंदोलन को समर्थन देने के लिए धरना स्थल पर पहुंच सकते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों से कोयला परिवहन मार्ग से उड़ने वाली धूल और भारी वाहनों की आवाजाही ने आसपास के गांवों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। उनका कहना है कि प्रदूषण के कारण खेती को भारी नुकसान हुआ है, जबकि सड़क पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं से लोगों और पशुओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती गई।
उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें प्रदूषण से प्रभावित किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का भुगतान, सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक कोयला वाहनों के लिए पूर्व व्यवस्था के अनुसार नो-एंट्री लागू करना, ट्रांसपोर्टिंग रोड से टंडवा फोरलेन तक करीब तीन किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण, पंचायत में पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार, मुख्य मार्ग पर वाहनों के कारण लगने वाले जाम पर रोक, प्रभावित परिवारों को रोजगार में प्राथमिकता, प्रदूषण प्रभावित लोगों की नियमित स्वास्थ्य जांच तथा विस्थापित परिवारों को सभी वैधानिक लाभ शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।
आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों और हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उनका आरोप है कि वर्षों से कोयला ढुलाई जारी रहने के बावजूद किसानों को अब तक फसल नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिला है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रशासन और NTPC प्रबंधन उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते, तब तक आंदोलन और धरना जारी रहेगा। फिलहाल धरने के कारण कोयला परिवहन पूरी तरह बाधित है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
हजारीबाग से सुनील कुमार ठाकुर की रिपोर्ट