दुबई में खत्म हुई झारखंडी मजदूर की जिंदगी, सदमे में पूरा परिवार

दुबई में खत्म हुई झारखंडी मजदूर की जिंदगी, सदमे में पूरा परिवार

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jul 13, 2026, 11:50:00 AM

बेहतर आजीविका की उम्मीद में विदेश गए गिरिडीह के एक प्रवासी मजदूर की दुबई में मौत हो जाने से परिवार और गांव में शोक की लहर है। मृतक की पहचान लालचंद महतो के रूप में हुई है, जो इसी वर्ष जनवरी में रोजगार की तलाश में संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे थे। परिजन अब उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने और सरकार से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, दुबई पहुंचने के कुछ समय बाद लालचंद महतो को एक कंपनी में काम मिला था, लेकिन लगभग दो महीने बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। रोजगार छिनने के बाद वे लगातार कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। इस दौरान उनका पासपोर्ट और वीजा भी खो गया, जिससे उनकी स्वदेश वापसी की प्रक्रिया और जटिल हो गई। परिवार लंबे समय से उनकी तलाश और भारत लौटाने के प्रयास में लगा हुआ था।

बताया जाता है कि हाल के दिनों में दुबई में कार्यरत झारखंड के कुछ प्रवासी मजदूरों ने लालचंद महतो का पता लगाया था। उन्होंने मानवीय पहल करते हुए उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया तथा उनकी भारत वापसी की व्यवस्था करने की कोशिश शुरू की। इसी बीच उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और इलाज से पहले ही उनका निधन हो गया। साथियों ने यह दुखद सूचना परिवार तक पहुंचाई, जिसके बाद घर में मातम छा गया।

घटना की जानकारी मिलने पर प्रवासी मजदूरों के मुद्दों पर सक्रिय समाजसेवी सिकंदर अली मृतक के घर पहुंचे और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, इसलिए सरकार को तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराने के साथ-साथ पार्थिव शरीर को भारत लाने की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना है कि विदेशों में संकट में फंसे श्रमिकों के मामलों में त्वरित सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

सिकंदर अली ने यह भी कहा कि विदेशों में झारखंड के मजदूरों के सामने आने वाली समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। उन्होंने बताया कि गिरिडीह के द्वारका महतो और बोकारो के सत्येंद्र महतो के शव अभी भी सऊदी अरब में हैं। इसके अलावा गिरिडीह के बगोदर निवासी महेंद्र महतो सऊदी अरब में फंसे हुए हैं, जबकि डुमरी के हुलास महतो दुबई की जेल में बंद हैं।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे मामलों को केवल व्यक्तिगत त्रासदी मानकर छोड़ने के बजाय व्यापक स्तर पर समाधान की दिशा में काम किया जाए। उनका कहना है कि राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराकर पलायन को कम किया जा सकता है, जिससे बेहतर कमाई की उम्मीद में विदेश जाने वाले मजदूरों को जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।