धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) उत्तम आनंद की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दोषी ठहराए गए लखन वर्मा और राहुल वर्मा की अपील को खारिज करते हुए सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखा है। खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि न्यायपालिका पर सीधा हमला थी।
न्यायमूर्ति रोगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दोनों दोषियों की उस आपराधिक अपील को अस्वीकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले के तथ्यों को पर्याप्त मानते हुए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
यह मामला 28 जुलाई 2021 की सुबह का है। धनबाद के रणधीर वर्मा चौक के निकट एडीजे उत्तम आनंद नियमित रूप से मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान पीछे से आए एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज और जांच में मिले साक्ष्यों ने संकेत दिया कि यह सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित हत्या का मामला था।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। मामले की तह तक पहुंचने और संभावित साजिश की जांच के लिए सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसी इंटरपोल से भी सहयोग लिया था।
सीबीआई की विशेष अदालत ने त्वरित सुनवाई के बाद 6 अगस्त 2022 को लखन वर्मा और राहुल वर्मा को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से अधिवक्ता सब्यसाची ने पक्ष रखा, जबकि सीबीआई का प्रतिनिधित्व भारत सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव ने किया। हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा बरकरार रहेगी।