पटना: राज्य में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने तथा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सक शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके तहत राज्य के पांच राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियोजन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
नियमित नियुक्ति होने तक इन चिकित्सा महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के कुल 366 रिक्त पदों पर संविदा के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस निर्णय से चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक गतिविधियों को और मजबूती मिलेगी।
मंत्रीपरिषद के फैसले पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार आवश्यक कदम उठा रही है। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सक शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। नियमित नियुक्ति होने तक 366 सहायक प्राध्यापकों का संविदा के आधार पर नियोजन किया जा रहा है, ताकि चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग, नई दिल्ली के निर्धारित मानकों के अनुरूप चिकित्सक शिक्षकों की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने कहा कि बेहतर चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से ही सक्षम एवं कुशल चिकित्सकों का निर्माण संभव है। सरकार का प्रयास है कि राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण विकसित हो तथा मरीजों को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
जिन चिकित्सा महाविद्यालयों में संविदा पर सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति होगी उनमें राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, पूर्णियाँ, जननायक कर्पूरी ठाकुर चिकित्सा महाविद्यालय, मधेपुरा, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, छपरा, सारण और श्री राम जानकी चिकित्सा महाविद्यालय, समस्तीपुर शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह पहल राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग, नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप चिकित्सक शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ भविष्य के चिकित्सकों के प्रशिक्षण को भी बेहतर आधार मिलेगा।