शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि शिक्षा अधिकारियों को आम जनता से सरोकार रखना होगा। अधिकारी शिक्षक हितैषी बनें और आम लोगों के बीच अपने व्यवहार से विश्वास पैदा करें। यही हमारा सबसे बड़ा संकल्प हो। तिवारी सोमवार को अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल सरकार के भरोसे काम न करें, बल्कि जन सहयोग से भी समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता विकसित करें। इसके लिए गांव-गांव जाकर लोगों से मिलना होगा और जनप्रतिनिधियों से दूरी कम करनी होगी। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह तक घर छोड़कर जनता के बीच रहने का अभियान चलाने पर भी विचार किया जा रहा है।
तिवारी ने कहा कि छठी कक्षा से 12वीं तक के बच्चों को कौशलयुक्त बनाने के लिए एक माह के भीतर योजना तैयार की जाएगी। स्कूलों में वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर उपलब्ध होने के बावजूद केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि कौशलयुक्त युवाओं को तैयार करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जल्द ही हर प्रखंड में समेकित विद्यालय और गुरुकुलम की स्थापना की जाएगी। यहां वेद-विज्ञान, कौशल विकास सहित विभिन्न विषयों की पढ़ाई होगी। इसकी शुरुआत बक्सर से की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य, पीएचईडी, राजस्व एवं भूमि सुधार सहित अन्य विभागों को शिक्षा विभाग से जोड़ने का काम किया जा रहा है, ताकि विद्यालयों और बच्चों से जुड़ी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि विद्यालय सिर्फ भवन नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण का केंद्र हैं। शिक्षक शिक्षा की आत्मा हैं। तिवारी ने कहा कि हर क्षेत्र में बिहार की बेटियों ने बेटों को पीछे छोड़ा है। राज्य सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं ने बेटियों की शिक्षा और आगे बढ़ने की गति को और तेज किया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मदरसों के माध्यम से उर्दू को भी बढ़ावा दिया जाएगा और संस्कृत को भी। उन्होंने कहा कि दोनों भारत माता की संतान हैं और शिक्षा व्यवस्था में सभी भाषाओं एवं विषयों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। शिक्षा अधिकारियों के अधिकारों में कटौती से संबंधित चर्चा पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस विषय पर सरकार ध्यान देगी, लेकिन किसी को भी अनियमितता या लूट की छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 13 जिलों से अनियमितता की शिकायतें मिली हैं। संबंधित अधिकारी इन शिकायतों को तुरंत दूर करें। शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब हर छह माह में इसी तरह की राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। अगली कार्यशाला गया या वाल्मीकिनगर में आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में स्थापित मॉडल स्कूलों के प्राचार्यों की अलग कार्यशाला पटना के ज्ञान भवन में आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन्हीं मॉडल स्कूलों से भविष्य की प्रतिभाओं को तराशना होगा।
शिक्षा मंत्री ने सभी अधिकारियों और शिक्षकों से 17 अगस्त तक अपने-अपने जिलों में बच्चों और शिक्षकों के साथ तिरंगा यात्रा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी यहां से यह संकल्प लेकर जाएं कि शिक्षा विभाग से कहीं से कोई शिकायत नहीं आए। सभी का व्यवहार पारदर्शी हो और शिक्षकों का स्थानांतरण निर्धारित नियमावली के आधार पर ही किया जाए।