IPS Shobha Ohatkar: हंटर वाली मैडम की विदाई, विकास वैभव के साथ विवाद खूब चर्चा में रहा

बिहार पुलिस महकमे में "हंटर वाली मैडम" के नाम से मशहूर 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी और गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक सह महासमादेष्टा शोभा ओहटकर मंगलवार, 30 जून को सेवानिवृत्त हो गईं।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 01, 2026, 12:26:00 PM

बिहार पुलिस महकमे में "हंटर वाली मैडम" के नाम से मशहूर 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी और गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक सह महासमादेष्टा शोभा ओहटकर मंगलवार, 30 जून को सेवानिवृत्त हो गईं। पटना के बिहटा स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान, बिहार गृह रक्षा वाहिनी में आयोजित विदाई समारोह के साथ तीन दशक से अधिक लंबे उनके प्रशासनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया। 

शोभा ओहटकर उन चुनिंदा महिला आईपीएस अधिकारियों में रही हैं, जिन्होंने अपने कड़क मिजाज, साहसिक फैसलों और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के कारण अलग पहचान बनाई। महज 22 वर्ष की उम्र में आईपीएस बनने वाली शोभा ओहटकर की पहली पोस्टिंग 1992 में पटना सिटी एएसपी के रूप में हुई थी। उस दौर में बिहार अपराध, अपहरण, रंगदारी और गैंगवार की आग में झुलस रहा था। 

कहा जाता है कि जब युवा आईपीएस अधिकारी बुलेट मोटरसाइकिल पर गश्त करती थीं, तो अपराधियों में खौफ का माहौल पैदा हो जाता था। पुणे में जन्मी शोभा ओहटकर ने हैदराबाद से राजनीति विज्ञान में एमए किया और उसके बाद सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। उनके पिता बलराम ओहटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर रहे थे और शोभा हमेशा अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता के संस्कारों और प्रेरणा को देती रहीं।

बिहार और तत्कालीन संयुक्त बिहार-झारखंड के छह जिलों में बतौर एसपी उनका कार्यकाल काफी चर्चित रहा। पटना, दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली और देवघर में उन्होंने अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए। खासकर हजारीबाग में कोयला माफियाओं के खिलाफ उनकी कार्रवाई ने पूरे देश का ध्यान खींचा। करोड़ों रुपये के अवैध कोयले की जब्ती और दर्जनों तस्करों की गिरफ्तारी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और इसी कार्रवाई के कारण उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ।

देवघर में उनकी कार्यशैली ने उन्हें "हंटर वाली मैडम" का नाम दिलाया। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार की बढ़ती घटनाओं से नाराज होकर उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। उस दौर में अपराधियों को पकड़कर सार्वजनिक रूप से हंटर से दंडित किए जाने की घटनाएं खूब चर्चा में रहीं। समर्थकों ने इसे अपराधियों के खिलाफ कठोर संदेश माना, तो आलोचकों ने इसे कानून की परिधि से बाहर की कार्रवाई बताया। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि उस समय उनका नाम अपराधियों में दहशत का पर्याय बन गया था।

1998 में दरभंगा की कमान संभालने के बाद उन्होंने अपहरण उद्योग पर बड़ी चोट की। लगातार जांच और कार्रवाई के जरिए कई बड़े गिरोहों का पर्दाफाश किया। वैशाली में भी उन्होंने राघोपुर दियारा के कुख्यात अपराधी गिरोहों पर ऐसा शिकंजा कसा कि एक-एक कर 16 से 17 गैंग का नेटवर्क ध्वस्त हो गया।वर्ष 2000 में वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर महाराष्ट्र चली गईं और लगभग दो दशक बाद 2020 में बिहार लौटीं। इसके बाद उन्हें डीजी रैंक में प्रोन्नति मिली और उन्होंने बिहार फायर सर्विसेज तथा होमगार्ड के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हालांकि, उनके करियर का अंतिम चरण विवादों से भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2023 में चर्चित आईपीएस अधिकारी और तत्कालीन आईजी विकास वैभव के साथ उनका विवाद पूरे बिहार में सुर्खियों में आ गया। विकास वैभव ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि उन्हें और उनके परिवार को अपमानित किया जा रहा है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। यह मामला केवल दो अधिकारियों के बीच का विवाद नहीं रहा, बल्कि जनभावनाओं का विषय बन गया।

बिहार के बड़े तबके ने विकास वैभव को एक ईमानदार, संवेदनशील और जनप्रिय अधिकारी के रूप में देखा है। यही कारण था कि उनके आरोपों के सामने आने के बाद राज्यभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई। कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने इसे प्रशासनिक मर्यादा और अधिकारियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। इस विवाद के बाद शोभा ओहटकर की जनस्वीकृति और लोकप्रियता को बड़ा झटका लगा और उनकी छवि पर प्रश्नचिह्न भी खड़े हुए।

हालांकि, शोभा ओहटकर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे अनुशासन और प्रशासनिक कार्यशैली का मामला बताया था। लेकिन यह भी सच है कि इस विवाद ने उनके लंबे और प्रभावशाली करियर पर एक स्थायी बहस छोड़ दी।आज जब शोभा ओहटकर सेवा से विदा हो रही हैं, तब उनके व्यक्तित्व के दो चेहरे एक साथ याद किए जाएंगे। एक तरफ अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाली, माफियाओं के लिए खौफ का नाम बनी "हंटर वाली मैडम", और दूसरी तरफ अपने करियर के अंतिम वर्षों में विवादों के घेरे में आई एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी।बिहार पुलिस के इतिहास में शोभा ओहटकर का नाम एक ऐसे अधिकारी के रूप में दर्ज रहेगा, जिसने अपने फैसलों से हमेशा चर्चा बटोरी-कभी साहस के लिए, कभी सख्ती के लिए और कभी विवादों के लिए।

अनूप नारायण सिंह