मुढ़ारी पैक्स कार्यालय परिसर में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों की बैठक

नालंदा के हरनौत प्रखंड का मुढ़ारी गांव इन दिनों नगर पंचायत में शामिल होने के मुद्दे पर दो खेमों में बंटा नजर आ रहा है। गांव में कहीं शहरी सुविधाओं की उम्मीद है तो कहीं खेती-किसानी पर टैक्स का बोझ बढ़ने का डर भी है।

नालंदा : नालंदा के हरनौत प्रखंड का मुढ़ारी गांव इन दिनों नगर पंचायत में शामिल होने के मुद्दे पर दो खेमों में बंटा नजर आ रहा है। गांव में कहीं शहरी सुविधाओं की उम्मीद है तो कहीं खेती-किसानी पर टैक्स का बोझ बढ़ने का डर भी है। इसी मुद्दे को लेकर मुढ़ारी पैक्स कार्यालय परिसर में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता पैक्स अध्यक्ष राम प्रसाद सिंह ने की। इस दौरान नगर पंचायत में शामिल होने के समर्थन में ग्रामीणों ने अपनी बातें रखीं। 

नगर पंचायत में शामिल होने से गांव में स्ट्रीट लाइट, बेहतर साफ-सफाई, नियमित कूड़ा उठाव और शहरी सुविधाएं मिलेंगी

उनका कहना है कि नगर पंचायत में शामिल होने से गांव में स्ट्रीट लाइट, बेहतर साफ-सफाई, नियमित कूड़ा उठाव और शहरी सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही विकास योजनाओं के लिए अधिक राशि और आवास योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं पिछले 29 अक्टूबर को इसी गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रखंड कार्यालय हरनौत पर धरना देकर मुढारी गांव को नगर पंचायत हरनौत में शामिल करने के फैसले का विरोध किया था। 

विरोध करने वालों का तर्क है कि गांव की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर है

विरोध करने वालों का तर्क है कि गांव की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर है और नगर पंचायत बनने से टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। पैक्स अध्यक्ष श्रीराम प्रसाद ने बताया कि  करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण समर्थन में तो 10 प्रतिशत विरोध में खड़े दिखाई दे रहे है। ऐसे में गांव का यह विवाद पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।

नांलदा से मिथुन कुमार की रिपोर्ट