जिसके लौट आने का भरोसा नहीं हो और वह शख्स 22 साल बाद अगर आपके सामने आ जाए तो क्या करेंगे। ऐसा ही एक मामला बिहार के मधुबनी जिले से आया है। 22 साल बाद जब बेटा घर लौटा तो 70 साल की बूढ़ी मां खुद को रोक ना सकी और रोते हुए अपने जिगर के टुकड़े को सीने से लगा लिया। स्वागत में गांव भर की भीड़ उमड़ पड़ी। गाजे-बाजे के साथ उनका स्वागत किया गया। फिर 15 साल की उम्र में घर से बिछड़े बेटे ने मां को बताया कि इतने सालों तक वह कहां रहे और उनकी जिंदगी कैसे गुजरी।
दरअसल यह पूरा मामला मधुबनी के झंझारपुर प्रखंड के महेशपुरा गांव का है। 15 साल की उम्र में एक मां का बेटा घर से लापता हो गया था। आंखों में बेटे की एक झलक देखने की उम्मीद और हर गुजरते साल के साथ बढ़ती बेचैनी। परिवार ने लगभग मान लिया था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। लेकिन 22 साल बाद बेटा वापस लौटा तो 70 साल की मां लक्ष्मी देवी खुद को रोक नहीं सकीं। बेटे को देखते ही उसे सीने से लगा लिया। मां की आंखों से आंसू बहते रहे और बेटा भी चुपचाप मां को देखता रहा। वहां मौजूद लोगों की भारी भीड़ भी भावुक हो गई और बेटे और मां का यह मिलन देख भावुक हो गए।
15 साल की उम्र में घर से बिछड़े शंकर कुशवाहा बीते 8 सालों से ग्वालियर के ‘स्वर्ग सदन आश्रम’ में रह रहे थे. उन्होंने मां को बताया कि इतने सालों तक वह कहां और कैसे रहे। आश्रम में उनका इलाज हुआ और ठीक होने के बाद वहीं रहने लगे। मां बेटे की बातें सुनती रहीं और आंखों से आंसू बहते रहे। शंकर कुशवाहा करीब 22 साल पहले घर से लापता हो गए थे। उस समय उनकी उम्र महज 15 साल थी। परिवार के मुताबिक शंकर दिमागी रूप से कमजोर थे। घर से जाने के बाद परिवार ने उन्हें बहुत खोजा। रिश्तेदारों से लेकर आसपास के इलाकों तक तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
मधुबनी से लापता शंकर कुशवाहा मध्य प्रदेश के ग्वालियर जा पहुंचे। पिछले करीब आठ साल से वह ग्वालियर के आश्रम स्वर्ग सदन में रह रहे थे। बताया जाता है कि संस्था के संचालक विकास गोस्वामी और पवन सूर्यवंशी ने उन्हें करीब आठ साल पहले ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर बीमार और लाचार हालत में देखा था। दोनों उन्हें अपने आश्रम ले आए। वहां शंकर का कई महीनों तक इलाज चला। धीरे-धीरे उनकी हालत बेहतर हुई। स्वस्थ होने के बाद शंकर आश्रम में ही रहने लगे। वह संस्था के लोगों के साथ मिलकर सेवा के काम में हाथ बंटाने लगे। आश्रम ही उनका घर बन गया था।
अब बात करते हैं आखिर शंकर परिवार तक कैसे पहुंचा। तो मां और बेटे को 22 साल बाद मिलाने में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। ग्वालियर में तैनात डीएसपी संतोष कुमार पटेल ने आश्रम में रहने वाले लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो आगे बढ़ते-बढ़ते मधुबनी के झंझारपुर तक पहुंच गया। उसके परिवार के लोगों ने वीडियो देखा तो उनकी नजर शंकर पर जाकर ठहर गई. चेहरे को देखते ही उन्हें यकीन हो गया कि यह वही शंकर है, जो 22 साल पहले घर से गायब हो गया था। परिजनों ने तुरंत डीएसपी और आश्रम संचालकों से संपर्क किया। बातचीत और पहचान की पुष्टि होने के बाद ललित शास्त्री अपने भाई को लेने ग्वालियर रवाना हो गए।
आश्रम में जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ललित अपने भाई को लेकर मधुबनी के लिए निकल पड़े। बुधवार को जब शंकर अपने गांव महेशपुरा पहुंचे तो पूरे गांव को जैसे इसी पल का इंतजार था। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। शंकर के गले में माला डाली गई। बेटे के घर पहुंचते ही 70 साल की मां लक्ष्मी देवी की आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्होंने शंकर को सीने से लगा लिया। मानो 22 साल की दूरी जैसे एक पल में खत्म हो गई। पिता की आंखें भी नम थीं। भाई-बहनों और परिवार के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। शंकर को देखने के लिए गांव की गलियों में लोगों की भीड़ जमा गई और तरह तरह कहानियां चलने लगी।