मिथिलांचल के लोगों के लिए तीन दशक लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है। दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी ऐतिहासिक चीनी मिलों को नई सहकारी चीनी मिलों के रूप में फिर से शुरू करने की मंजूरी मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर 2026 को इन दोनों परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे। इस ऐतिहासिक शिलान्यास की खबर मिलते ही स्थानीय किसानों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। यह पहल मिथिलांचल के किसानों और आम जनता के लिए किसी बड़े सपने के सच होने जैसी है। माना जा रहा है कि चीनी मिल शुरू होने से मिथिलांचल में पलायन रुकेगा और लोगों को रोजगार मिलेगा।
मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा-राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा रैयाम (दरभंगा) एवं सकरी (मधुबनी) की बंद पड़ी चीनी मिलों की भूमि पर नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना तथा गन्ने के उपोत्पाद (By-products) आधारित इकाइयों की स्थापना एवं संचालन के लिए इण्डियन पोटाश लिमिटेड (IPL), नई दिल्ली को स्वीकृति दिया जाना मिथिला के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है।
रैयाम (दरभंगा) में उपलब्ध लगभग 68 एकड़ भूमि पर प्रथम चरण में 3,500 TCD (Tonnes of Cane per Day) क्षमता की नई चीनी मिल स्थापित की जाएगी, जिसे आने वाले समय में 5,000 TCD तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके साथ सह-विद्युत उत्पादन इकाई, इथेनॉल डिस्टिलरी तथा कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकाई स्थापित करने की भी योजना है। रैयाम में चीनी कॉम्प्लेक्स की प्रस्तावित कुल लागत लगभग ₹504.67 करोड़ है।
वहीं सकरी (मधुबनी) में उपलब्ध लगभग 30 एकड़ भूमि पर 3,500 TCD क्षमता की चीनी मिल स्थापित की जाएगी, जिसे आने वाले समय में 5,000 TCD तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके साथ सह-विद्युत उत्पादन इकाई की स्थापना भी प्रस्तावित है। सकरी चीनी मिल एवं सह-विद्युत उत्पादन इकाई के लिए प्रस्तावित कुल लागत लगभग ₹347.76 करोड़ है।
इस प्रकार दोनों परियोजनाओं में प्रस्तावित निवेश का कुल आकार लगभग ₹852.43 करोड़ है। यह मॉडल केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गन्ने के प्रत्येक उपोत्पाद का उपयोग कर एक समग्र सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा।
साथ ही इस परियोजना में गन्ना उत्पादक, इच्छुक एवं पात्र किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से संगठित किया जाएगा। प्रस्तावित सहकारी समितियों का उद्देश्य किसानों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि आदान, आधुनिक कृषि यंत्र, तकनीकी परामर्श एवं कृषि ऋण जैसी सुविधाओं से जोड़ना तथा संबंधित चीनी मिलों को गन्ने की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा। इससे क्षेत्र में गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय के नए अवसर भी बनेंगे।
परियोजना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए बिहार सरकार द्वारा बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति, 2026 के प्रावधानों के अनुरूप सहायता का प्रावधान किया गया है। उक्त परियोजना के लिए रैयाम की लगभग 68 एकड़ तथा सकरी की लगभग 30 एकड़ भूमि इण्डियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को ₹1 टोकन राशि पर 30 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराने का प्रावधान भी किया गया है। परियोजना के विस्तार अथवा अन्य इकाइयों की स्थापना के लिए भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान भी रखा गया है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि इण्डियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को चीनी उद्योग के संचालन का अनुभव प्राप्त है और वह विभिन्न राज्यों में चीनी मिलों के संचालन से जुड़ा रहा है। इसी अनुभव को देखते हुए रैयाम एवं सकरी में प्रस्तावित सहकारी चीनी मिलों की स्थापना एवं संचालन के लिए इण्डियन पोटाश लिमिटेड (IPL) को उपयुक्त भागीदार के रूप में चुना गया है।
निश्चित रूप से इस महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक निर्णय से स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और मिथिला की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। साथ ही मिथिला में कृषि, उद्योग, ऊर्जा और रोजगार को एक साथ जोड़ने वाले नए आर्थिक मॉडल की शुरुआत होगी।
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि बंद मिलों के पुनरुद्धार से युवाओं को घर के पास रोजगार मिलेगा और पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही किसानों को अपनी फसल बेचने के बेहतर और सुलभ अवसर उपलब्ध होंगे।