सार्वजनिक काली मंदिर में विधिवत स्थापित हुईं मां काली की प्रतिमा, श्रद्धालुओं में उत्साह

किशनगंज जिले के नगर पंचायत पौआखाली स्थित सार्वजनिक काली मंदिर में मां काली की प्रतिमा को विधिवत रूप से स्थापित किया गया। बता दें कि मंदिर का नए सिरे से निर्माण कर उसी ऐतिहासिक एवं पारंपरिक स्थान पर मां काली की प्रतिमा की पुनर्स्थापना की गई।

किशनगंज जिले के नगर पंचायत पौआखाली स्थित सार्वजनिक काली मंदिर में मां काली की प्रतिमा को विधिवत रूप से स्थापित किया गया। बता दें कि मंदिर का नए सिरे से निर्माण कर उसी ऐतिहासिक एवं पारंपरिक स्थान पर मां काली की प्रतिमा की पुनर्स्थापना की गई। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

बताया जाता है कि इस सार्वजनिक काली मंदिर की स्थापना राजा पीसी लाल के समय में ही हुई थी। तब से यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। वर्तमान समय में विशेष रूप से चौधरी परिवार द्वारा मंदिर की देखरेख, रखरखाव एवं पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी निभाई जा रही है।

इस पुनीत कार्य में रत्नन लाल उर्फ खोखा चौधरी, प्रदीप चौधरी, अजीत चौधरी, कृष्णा चौधरी, विष्णु चौधरी, विधान चौधरी, गोपाल चौधरी, चंदन चौधरी एवं देवाशीष चौधरी की विशेष भूमिका सराहनीय रही है। परिवार के सदस्य प्रत्येक वर्ष पूरी श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण के साथ मां काली की भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन करते हैं।

इस मंदिर की धार्मिक महत्ता केवल ननकार तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों एवं क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में भी इसकी विशेष पहचान है। प्रत्येक वर्ष यहां आयोजित पूजा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। भक्तजन अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान, सुख-समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना लेकर मां के दरबार में पहुंचते हैं तथा श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगते हैं।

स्थानीय स्तर पर इस मंदिर को लेकर लोगों की गहरी आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

ऐसे में चौधरी परिवार द्वारा वर्षों पुरानी धार्मिक विरासत को संजोते हुए मंदिर का नए सिरे से निर्माण कराना और परंपरा को आगे बढ़ाना निश्चित रूप से प्रशंसनीय पहल है। परिवार का यह प्रयास न केवल धार्मिक धरोहर के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक समर्पण और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान है।

किशनगंज से इमामुद्दीन की रिपोर्ट