जिला मुख्यालय में साइबर अपराधियों का हौसला इस कदर बढ़ गया है कि अब वे सरकारी अधिकारियों और डॉक्टरों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला गोपालगंज सदर अस्पताल से सामने आया है, जहाँ तैनात एक सरकारी डॉक्टर का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर उनके परिचित से 40 हजार रूपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने इतने पर ही बस नहीं किया, बल्कि दोबारा ब्लू डार्ट का एजेंट बनकर और पैसे ऐंठने की कोशिश भी की। पीड़ित डॉक्टर ने इस संबंध में गोपालगंज साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
मिली जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में कार्यरत डॉ. संतोष कुमार का व्हाट्सएप अकाउंट साइबर अपराधियों ने हैक कर लिया। अकाउंट हैक करने के बाद ठगों ने डॉक्टर की प्रोफाइल का इस्तेमाल करते हुए उनके परिचितों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया। ठगों ने डॉक्टर बनकर मैसेज में लिखा, "मेरा UPI काम नहीं कर रहा है और मुझे बेहद जरूरी काम के लिए तत्काल पैसों की आवश्यकता है। डॉक्टर का मैसेज समझकर एक परिचित झांसे में आ गया और उसने ठगों द्वारा दिए गए नंबर पर तुरंत 40 हजार रूपये ट्रांसफर कर दिए।
पहली बार में 40 हजार रूपये ऐंठने के बाद भी साइबर अपराधियों का मन नहीं भरा। उन्होंने पीड़ित के परिचित को दोबारा फोन किया और खुद को 'ब्लू डार्ट एक्सप्रेस' कूरियर कंपनी का एजेंट बताते हुए और रुपयों की मांग की। हालांकि, इस बार परिचित को शक हो गया और अपराधियों की यह दूसरी चाल नाकाम रही। जब डॉक्टर को अपने अकाउंट हैकिंग और ठगी की भनक लगी, तो उनके होश उड़ गए। पीड़ित डॉ. संतोष कुमार ने तत्काल गोपालगंज साइबर थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की लिखित जानकारी दी है। उन्होंने पुलिस से ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और UPI ट्रांजैक्शन आईडी के आधार पर अपराधियों को चिन्हित कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साइबर थाना पुलिस आवेदन मिलते ही मामले की तकनीकी जांच और अपराधियों की लोकेशन ट्रेस करने में जुट गई है।
इस घटना के बाद साइबर पुलिस ने आम जनता के लिए अलर्ट जारी किया है। यदि आपका कोई करीबी, दोस्त या अधिकारी व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर अचानक पैसों की मांग करता है, तो बिना फोन पर बात किए या सीधे मिले पैसे ट्रांसफर न करें। टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन रखें: अपने व्हाट्सएप की सुरक्षा के लिए सेटिंग में जाकर 'Two-Step Verification' को हमेशा ऑन रखें। किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत नजदीकी साइबर थाना या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट