गोपालगंज। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सरकार भले ही डिजिटल निगरानी और सख्ती की बात करती हो, लेकिन गोपालगंज से सामने आया एक मामला पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक सरकारी शिक्षिका के विदेश में रहने के दौरान भी स्कूल के उपस्थिति रजिस्टर में उनकी हाजिरी दर्ज होती रही। मामला सामने आने के बाद विभागीय जांच शुरू हुई है और अब शिक्षिका की नौकरी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
मामला थावे प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मुनरी टोला से जुड़ा बताया गया है, जहां शिक्षिका सना रियाज के पदस्थापित होने की जानकारी सामने आई है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि शिक्षिका 21 जनवरी से 30 मार्च 2017 तक सऊदी अरब में थीं। उनके पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से विदेश में रहने की पुष्टि हुई, लेकिन इसी अवधि में स्कूल के रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दर्ज पाई गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विदेश यात्रा के दौरान भी उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड सामान्य रूप से चलता रहा। जांच के दौरान डायट प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड में भी उनकी उपस्थिति दर्ज होने की बात सामने आई है। विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई।
बच्चे के जन्म पर भी छुट्टी नहीं
जांच में एक और सवाल खड़ा हुआ। शिक्षिका के पुत्र का जन्म 2 नवंबर 2017 को हुआ था। जांच अधिकारी के अनुसार उस अवधि में भी मातृत्व अवकाश से संबंधित कोई आवेदन नहीं दिया गया था। हालांकि शिक्षिका ने अपने जवाब में कहा कि बच्चे के जन्म के समय उन्होंने मातृत्व अवकाश नहीं लिया था, बल्कि सामान्य प्रसव के लिए आवश्यक अवकाश लिया था। जांच अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना।
बीमारी का इलाज कराने विदेश जाने का दावा
शिक्षिका ने अपने जवाब में विदेश यात्रा की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का इलाज बताया। उन्होंने कहा कि वह करीब 67 दिनों तक चिकित्सा संबंधी कारणों से सऊदी अरब में रहीं। लेकिन जांच के दौरान विदेश यात्रा से संबंधित पर्याप्त चिकित्सकीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई।
पासपोर्ट ने खोल दी पोल
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पासपोर्ट और यात्रा रिकॉर्ड बने। जांच में पासपोर्ट संख्या P2449998 तथा ई-टिकट से विदेश यात्रा की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। दस्तावेजों के अनुसार शिक्षिका 21 जनवरी 2017 को दिल्ली से सऊदी अरब गईं और 30 मार्च 2017 को वापस लौटीं। यानी एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड में स्कूल में उपस्थिति दर्ज होती रही और दूसरी तरफ यात्रा दस्तावेज उन्हें देश से बाहर बताते रहे।
अब असली सवाल सिस्टम पर
यह मामला केवल एक शिक्षिका की कथित अनियमितता तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षिका विदेश में थीं तो स्कूल में उनकी हाजिरी कौन दर्ज कर रहा था? अगर उपस्थिति रजिस्टर में वास्तव में लगातार हाजिरी दर्ज की गई, तो इसकी जिम्मेदारी केवल संबंधित शिक्षिका तक सीमित रहेगी या उपस्थिति प्रमाणित करने वाले अधिकारियों और विद्यालय स्तर के जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?
जांच के लिए पासपोर्ट, वीजा, ई-टिकट, डायट प्रशिक्षण की उपस्थिति पंजिका, बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र, अवकाश संबंधी दस्तावेज और दोनों पक्षों के लिखित जवाब सहित कई रिकॉर्ड खंगाले गए हैं। अब कार्रवाई सिर्फ एक शिक्षिका पर होगी या उस पूरी व्यवस्था की भी जांच होगी, जिसने विदेश में मौजूद कर्मचारी की स्कूल में हाजिरी दर्ज होने दी—यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
अनूप नारायण सिंह