धान अधिप्राप्ति की तैयारी तेज, 174 समितियों का चयन, डीएम ने दिया अल्टीमेटम

खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के तहत जिले में धान अधिप्राप्ति की तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को जिला पदाधिकारी समीर सौरभ की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित कर धान खरीद से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की गई।

गोपालगंज : खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के तहत जिले में धान अधिप्राप्ति की तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को जिला पदाधिकारी समीर सौरभ की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित कर धान खरीद से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक में किसान निबंधन, समितियों के चयन, लक्ष्य आवंटन और राइस मिलों के निबंधन सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। जिले में धान अधिप्राप्ति के लिए कुल 174 समितियों का चयन किया गया है। डीएम ने सभी सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को किसान निबंधन की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक योग्य किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य पर धान बेचने का लाभ मिल सके।

वहीं, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में शत-प्रतिशत सीएमआर (समतुल्य चावल) की आपूर्ति नहीं करने वाली समितियों को विस्तारित समय सीमा 10 नवंबर 2026 तक बकाया आपूर्ति पूरी करने का निर्देश दिया गया है। संयुक्त जांच दल (जेपीवी) की जांच में जिन समितियों के भंडारित धान की मात्रा में कमी पाई गई है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया।

सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच कितना अंतर?

धान अधिप्राप्ति को लेकर प्रशासन भले ही तैयारियों और पारदर्शिता के दावे कर रहा हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्स की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों के बीच अक्सर सवाल उठते रहे हैं। कई किसानों का आरोप है कि सरकारी स्तर पर धान खरीद की प्रक्रिया में वास्तविक किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। कुछ जगहों पर खरीदारी में निजी संबंधों को प्राथमिकता देने और कागजी प्रक्रिया तक ही अधिप्राप्ति सीमित रहने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि धान खरीद की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, तो बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और वास्तविक किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का सीधा लाभ मिल सकेगा। हालांकि इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।

 इस बार प्रशासन की अग्निपरीक्षा

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले में चयनित 174 समितियां वास्तव में कितने किसानों से धान की खरीद करती हैं और खरीदारी का लाभ जरूरतमंद किसानों तक कितना पहुंचता है। प्रशासन को केवल बैठकों और कागजी आंकड़ों तक सीमित रहने के बजाय पैक्स स्तर पर नियमित निरीक्षण, खरीद रजिस्टर की जांच और किसानों से सीधा फीडबैक लेने की व्यवस्था करनी होगी। धान अधिप्राप्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक किसानों से खरीदारी, बिचौलियों पर रोक और गड़बड़ी करने वाली समितियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। अब देखना होगा कि खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में जिला प्रशासन किसानों के भरोसे पर कितना खरा उतरता है और सरकारी धान खरीद की व्यवस्था कितनी पारदर्शी बन पाती है।


गोपालगंज से शंकर की रिपोर्ट